
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)16 मार्च।लोकसभा के बजट सत्र के दौरान आरा के सांसद सुदामा प्रसाद ने रेल बजट पर चर्चा करते हुए अपने क्षेत्र से जुड़ी रेलवे समस्याओं को सदन में उठाया।
उन्होंने कहा कि भारतीय रेल केवल एक परिवहन का साधन नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़, सामाजिक एकता की मजबूत कड़ी तथा करोड़ों गरीबों, मजदूरों, किसानों, प्रवासी श्रमिकों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों की जीवनरेखा है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने रेल मंत्रालय के लिए लगभग 2 लाख 78 हजार करोड़ रुपये का बजट रखा है और करीब 2 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय का प्रस्ताव दिया है। यह निश्चित रूप से एक बड़ा बजट है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह बजट वास्तव में आम यात्रियों की समस्याओं का समाधान कर पाएगा? क्या इससे छोटे और ग्रामीण रेलवे स्टेशनों की स्थिति सुधरेगी? क्या इससे रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी? और क्या रेलवे में लंबे समय से खाली पड़े लाखों पदों को भरा जाएगा?
उन्होंने कहा कि बजट का बड़ा होना ही विकास का प्रमाण नहीं होता, बल्कि उसका सही उपयोग ही वास्तविक विकास का प्रमाण होता है।
सांसद ने कहा कि वे इस बात के समर्थक हैं कि रेलवे का अलग बजट फिर से पेश किया जाना चाहिए, ताकि संसद में रेलवे से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत और गंभीर चर्चा हो सके।
उन्होंने कहा कि सरकार लगातार रेलवे के आधुनिकीकरण का दावा करती है और वंदे भारत जैसी सेमी हाई स्पीड ट्रेनें शुरू की गई हैं। यह एक सकारात्मक पहल है, लेकिन यह आधुनिकीकरण अभी भी कुछ चुनिंदा ट्रेनों और बड़े शहरों तक ही सीमित है। देश के हजारों छोटे रेलवे स्टेशन आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। कई स्टेशनों पर पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था और यात्रियों के लिए पर्याप्त छत जैसी मूलभूत सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं।
सांसद सुदामा प्रसाद ने कहा कि रेलवे की सुरक्षा देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। केवल घोषणाएँ पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इस दिशा में ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय रेल देश का सबसे बड़ा सरकारी नियोक्ता रहा है, लेकिन आज स्थिति यह है कि रेलवे में रोजगार के अवसर घटते जा रहे हैं और कर्मचारियों पर काम का अत्यधिक बोझ बढ़ता जा रहा है। हजारों पद खाली पड़े हैं, जिन्हें शीघ्र भरा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि रेलवे गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की यात्रा का सबसे बड़ा साधन है, लेकिन आज स्थिति यह है कि सामान्य ट्रेनों की संख्या कम होती जा रही है, स्लीपर और जनरल कोच घटाए जा रहे हैं और महंगी ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा रही है। ऐसे में देश का गरीब आदमी यह सवाल पूछ रहा है कि क्या रेलवे अब केवल अमीरों के लिए ही चल रही है?
सांसद ने कहा कि यात्रा सस्ती, सुरक्षित और सुलभ होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि कोरोना काल में बंद की गई साधारण ट्रेनों को फिर से शुरू किया जाए और साथ ही साधारण तथा दैनिक ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाए। इन ट्रेनों में थ्री-टियर तथा जनरल बोगियों की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि आम यात्रियों को राहत मिल सके।
उन्होंने कहा कि आज प्रवासी मजदूर और गरीब यात्री ट्रेनों में भेड़-बकरियों की तरह ठूंसकर यात्रा करने को मजबूर हैं, जो अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।
सांसद सुदामा प्रसाद ने अपने क्षेत्र बिहार के भोजपुर जिले की समस्याओं की ओर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि जिले के कई रेलवे स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म की ऊंचाई कम है, जिसके कारण यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने और उतरने में भारी परेशानी होती है। इन स्टेशनों पर सुलभ शौचालय तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है। उन्होंने मांग की कि प्लेटफॉर्म की ऊंचाई बढ़ाई जाए और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
इसके साथ ही उन्होंने निम्न मांगें भी रखीं—
@ नई दिल्ली–आरा के बीच चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस का ठहराव आरा स्टेशन पर किया जाए।
@ गया–दिल्ली रेलखंड पर महाबोधि एक्सप्रेस की तर्ज पर एक नई ट्रेन चलाई जाए।
@पटना–हावड़ा शताब्दी एक्सप्रेस का ठहराव/विस्तार आरा स्टेशन तक किया जाए।
@आरा से चेन्नई के लिए नई ट्रेन सेवा शुरू की जाए।
@ गंगा–दामोदर एक्सप्रेस का विस्तार आरा तक किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि आरा में बन रहा रेलवे फुटओवर ब्रिज कछुआ की चाल से भी धीमी गति से बन रहा है। उन्होंने मांग की कि इस कार्य को शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि हजारों लोगों को सुविधा मिल सके।
