
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 1 फरवरी।सांसद सुदामा प्रसाद ने वर्ष 2026–27 के आम बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मोदी सरकार का यह बजट कृषि, किसानों, भूमिहीनों और छोटे व्यवसायियों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि इस बजट से किसान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बजट में धान, गेहूं, दलहन और तेलहन पैदा करने वाले किसानों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। हमारा देश कृषि प्रधान होने के बावजूद घाटे में जा रही खेती को उबारने के लिए कोई प्रभावी योजना इस बजट में नहीं है। किसानों की आय बढ़ाने, एमएसपी की कानूनी गारंटी, जलवायु परिवर्तन के कृषि पर प्रभाव, भंडारण व्यवस्था तथा खाद्य प्रसंस्करण के सुदृढ़ीकरण जैसे मूलभूत मुद्दों का बजट में कहीं उल्लेख नहीं है।
ड्रोन, कृषि में एआई और उच्च-मूल्य वाली कृषि पर फोकस जैसी परिधीय योजनाओं को किसानों के सशक्तिकरण के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। इसके अतिरिक्त, वित्तय वर्ष 2026–27 में उर्वरक और खाद्य सब्सिडी का आवंटन पिछले वर्ष के संशोधित अनुमानों से भी कम किया गया है। कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग के बजट में कटौती सरकार की कृषि कल्याण के प्रति उदासीनता को दर्शाती है।
शाहाबाद सहित मध्य बिहार के अर्थ व्यवस्था की जीवनरेखा मानी जाने वाली सोन नहरों के आधुनिकीकरण और सोन नदी पर इंद्रपुरी जलाशय के निर्माण की मांग हम लंबे समय से करते आ रहे हैं। हाल ही में शाहाबाद के चारों सांसदों ने माननीय प्रधानमंत्री को इस संबंध में ज्ञापन भी सौंपा था। उम्मीद थी कि इस बजत में इसके लिए प्रावधान किया जाएगा, लेकिन एक बार फिर निराशा ही हाथ लगी।
उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा और गरीबी उन्मूलन से जुड़ी प्रमुख योजनाओं का आवंटन या तो वास्तविक रूप से घटा दिया गया है या स्थिर रखा गया है, जिससे भूमिहीनों और गरीबों के लिए जमीन और आवास का सपना सपना ही रह जाएगा।
सांसद ने कहा कि बजट में बड़े कॉरपोरेट घरानों को प्राथमिकता दी गई है, जबकि छोटे, मंझोले और फुटपाथी दुकानदारों व वव्यपारियो के लिए बजट में कोई जगह नही है।
उन्होंने यह भी कहा कि पूरे शाहाबाद क्षेत्र की चिरप्रतीक्षित मांग आरा–मुंडेश्वरी रेल लाइन सहित कई रेलवे परियोजनाओं के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है। यह बजट पूरी तरह जनविरोधी बजट है।
