
RKTV NEWS/पटना(बिहार )02 जनवरी।बिहार सरस मेला लोगो के आकर्षण का केंद्र रहा है। सिर्फ पटना ही नहीं बल्कि राज्य के अन्य जिलों से भी ग्रामीण शिल्प और कलाकृतियों के कद्रदान सरस मेला में लगे उत्पाद को अपने पसंद एवं जरुरत के हिसाब से खरीददारी करते हैं। जन-सामान्य के जरूरत की वस्तुएं सरस मेला में उपलब्ध रहती हैं। लिहाजा आगंतुक अपनी अभिरुचि एवं सामर्थ्य के अनुरूप खरीदारी करते हैं और देशी व्यंजनों का लुत्फ़ उठाते हैं।
12 दिसंबर 25 से ग्रांधी मैदान, पटना में आयोजित बिहार सरस मेला अब परवान पर है। मेला का समापन 4 जनवरी 26 को होना है लिहाजा लोग अपने मनपसंद कलाकृतियों एवं व्यंजनों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं।
मेला के प्रति लोगों के आकर्षण देखते ही बन रहा है।आयोजन के 21 वें दिन तक खरीद-बिक्री का आंकड़ा 28 करोड़ रूपया पार कर गया है l 20 वें दिन 31 दिसंबर 25 को लगभग एक करोड़ 31 लाख रुपये से अधिक का व्यवसाय हुआ है।
देशी अंदाज में आयोजित सरस मेला आधुनिक समाज में भी अपनी एक अलग ही अपनी पहचान बना लिया है। मेला में बिके उत्पाद और उनके प्रति लोगों का बढ़ रहा क्रेज इस बात का प्रमाण है कि लोग आधुनिकता से दूर गाँव की ओर लौट रहे हैं।अपने घरों को सवारने के लिए लोग ग्रामीण शिल्प और उत्पाद को ही तरजीह दे रहे हैं।सरस मेले में लोगों का सबसे बड़ा रुझान ग्रामीण शिल्पकला की तरफ ही है।
ग्रामीण विकास विभाग के निर्देशन में जीविका द्वारा आयोजित सरस मेला के आयोजन का उद्देश्य ही है ग्रामीण शिल्प कला को बढ़ावा देना एवं बाज़ार उपलब्ध कराना। लिहाजा सरस मेला लोगों की कसौटी पर खरा उतरा है। वर्तमान समय में सरस मेला राष्ट्रीय मेला के स्वरुप में पादर्शित है।
शुक्रवार को सेमिनार कक्ष में जीविका के सामाजिक विकास विधा, पटना द्वारा सजावटी पौधों के देखभाल एवं विकास को लेकर प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया।इस कार्यशाला में दीदी की पौधशाला सचालित करने वाली जीविका दीदियों एवं नोडल जीविकाकर्मी को प्रशिक्षण दिया गया।डॉ. संगीता एवं मनोज कुमार, प्रबंधक, सामाजिक विकास, जीविका ने प्रशिक्षण दिया।
मुख्य सांस्कृतिक मंच पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पटना द्वारा “विधिक साक्षरता – हटाये दुर्बलता” कार्यक्रम का आयोजन किया गया l इस कार्यक्रम के तहत दर्शकों के जमीनी विवाद, घरेलु हिंसा, और साईबर करीम से संबंधित सवालों का जवाब दिया गया और उन्हें जागरूक भी किया गया।इस अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के देवेन्द्र प्रसाद, संतोष कुमार, रेखा देवी, प्रेम समयीयार , कन्हैया जी, अमर जी और अनफ ने दर्शकों को क़ानूनी सलाह दी।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत राजेश ने कविता पाठ किया।तत्पश्चात रानू सक्सेना ने लोक गीतों को सुनाकर दर्शकों को बिहार की संस्कृति से परिचित कराया।
“सिया सुकुमारी मिथिला की दुलारी” की प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव विहोर किया। मंच संचालन श्रीमती नाज़िश बानो, राज्य परियोजना प्रबंधक, जीविका ने की।कार्यक्रम का संयोजन आशा कुमारी की रही।
सतत जीविकोपार्जन योजना, लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान, सोल्स, शिल्प ग्राम, मधु ग्राम, जानकी सिलाई, महानंदा चाय , ग्राहक सेवा केंद्र, दीदी की रसोई आदि के स्टॉल्स बढ़ते बिहार की परिकल्पना को साकार करते हुए नजर आ रहे है।कई सरकारी विभाग एवं बैंको के स्टॉल आगंतुकों को लोक कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित कर रहे हैं।सरस मेला के माध्यम से जीविका दीदियाँ और ग्रामीण महिलायें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त तो हो ही रही हैं दुसरे प्रदेश से आई महिलाए भी एक दुसरे के लोक कला, शिल्प और संस्कृति से अवगत होते हुए महिला स्वावलंबन की नाजिर पेश कर रही है। बाईस्कोप , फन ज़ोन, फ़ूड ज़ोन, पालना घर और सेल्फी केंद्र आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं ।
