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पटना: बढ़ती भीड़ को देख बढ़ाई गई बिहार सरस मेला की अवधि, 04 जनवरी को होगा समापन।

दिन प्रतिदिन बढ़ रहा मेले का क्रेज,15 दिनों में व्यवसाय ने लगाई 21 करोड़ पार की छलांग।

क्रीड़ा जोन में बच्चे कर रहे मस्ती,खेल का ले रहे आनंद।

RKTV NEWS/पटना(बिहार )27 दिसंबर।सरस मेला के कद्रदानों के लिए अच्छी खबर है। सरस मेला के आयोजन की अवधि एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी गई है। अब यह मेला 4 जनवरी 26 तक चलेगा । हालांकि केवल 1 जनवरी 2026 को मेला का आयोजन स्थगित रहेगा । सरस मेला के प्रति लोगों के आकर्षण को देखते हुए और मेला में बिक रहे उत्पादों एवं व्यंजनों की भारी मांग को देखते हुए मेला की अवधि बढ़ाई गई है। सरस मेला का समापन पहले 28 दिसंबर को होना था लेकिन अब समापन 4 जनवरी 2026 को होगा ।
ग्रामीण शिल्प एवं उत्पाद की खरीददारी से लेकर देशी व्यंजनों के लुत्फ़ उठाने हेतु भाग दौड़ की जिंदगी से अलग परिवार और परिजनों के साथ मेला का आनंद उठाने का बेहतर अवसर बिहार सरस मेला प्रदान कर रहा है। प्रतिदिन एक लाख से अधिक मेला के कद्रदान मेला परिसर आ रहे हैं अपने मनपसंद उत्पादों की खरीददारी की तथा स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ़ उठा रहे हैं।
ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से 12 दिसंबर 2025 से 04 जनवरी 2026 तक जीविका, ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया जा रहा है। सरस मेला में खरीद-बिक्री का आंकड़ा अपने पूर्व के रिकार्ड को तोड़ते हुए आगे बढ़ रहा है l 15 दिनों में खरीद-बिक्री का आंकड़ा 21 करोड़ रूपया पार कर गया l मेला के आयोजन के 15 वें दिन 1 करोड़ 41 लाख रुपये से अधिक की खरीद-बिक्री हुई l अब तक अनुमानतः 12 लाख से अधिक लोग आ चुके हैं।
बिहार सरस मेला का आयोजन ग्रामीण शिल्पकार एवं महिलाओं के लिए खास मायने रखता है l इस आयोजन से ग्रामीण शिल्प एवं उत्पाद को प्रोत्साहन एवं बाज़ार तो मिल ही रहा है देशी एवं पौष्टिक व्यंजन तथा आयुर्वेदिक पौधे भी बहुतायत मात्रा में बिक रहे हैं। रूना देवी, जीविका दीदी के द्वारा दीदी की पौधशाला स्टॉल पर आयुर्वेदिक पौधों की खूब बिक्री हो रही है।रूना देवी, धनरुआ, पटना की रहनेवाली हैं और वर्ष 2015 से उमा जीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। वर्ष 2021 से वो दो बीघा जमीन पर नर्सरी चला रही हैं। दूसरी बार आयुर्वेदिक पौधे, फूल एवं फल के पौधों की प्रदर्शनी एवं बिक्री के लिए सरस मेला में लेकर आई हैं।अपने नर्सरी में उत्पादित पौधे की सप्लाई वन विभाग एवं मनरेगा को करती हैं।इनके पौधशाला में शिशु पौधा उत्पादन क्षमता 1 लाख से अधिक की है l जीविका दीदी की पौधशाला से उन्हें काफी मुनाफा हो रहा है l सरस मेला में लगे अपने स्टॉल के माध्यम से 15 दिनों में लगभग डेढ़ लाख रुपये से अधिक की पौधे की बिक्री कर चुकी हैं l इनके स्टॉल से इन्सुलिन , एलोवेरा, इलायची , तेजपत्ता, लाल चन्दन, इस्तिविया , अर्केरिया, पपीता, बेल, अजवाइन , लेमन ग्रास, बसमतिया, कड़ी पत्ता, श्याम पत्ता, राम तुलसी, पत्थर चूर्ण, सतावर, आम, नींबू,क्रोटन, गेंदा , डहेलिया, गुलदाऊदी आदि पौधे खूब बिक रहे हैं।
स्वयं सहायता समूह से जुडी महिला उद्धमियों एवं स्वरोजगारियों के स्टॉल्स पर आचार-पापड़ , भागलपुर और बांका के कतरनी एवं मालभोग चावल- चूड़ा , रवा और गुड आगंतुकों द्वारा पसंद किये जा रहे है। मसालेदार गुड़ की बड़ी मांग है। खादी , हैंडलूम, टेरीकॉटन, सिल्क और उन से बने परिधान, अगरबत्ती, लाह की चूड़ियां सीप और मोती से बने बनी श्रृंगार की वस्तुएं , आयुर्वेदिक पाचक, रोहतास की गुड़ की मिठाई, पापड़, मिठाई , मुरब्बे, घर- बाहर के सजावट के सामान, खिलौने के अलावा मधुबनी पेंटिंग पर आधारित मनमोहक कलाकृतियां, कपड़े , कालीन, पावदान, आसाम और झारखण्ड से आई बांस और ताड़-खजूर के पत्ते से बनी शिल्प एवं कलाकृतियां ग्रामीण शिल्पकारों के हुनर को प्रदर्शित करते हुए लोगों को मुग्ध कर रही हैं।कृत्रिम फूल और बचपन के पारंपरिक खिलौने खूब बिक रहे हैं।सहारनपुर के लकड़ी के फर्नीचर, झूले और साज-सज्जा के उत्पादों की खूब बिक्री हो रही है।
ग्रामीण शिल्प, हुनर, उत्पाद एवं देशी व्यंजनों को प्रोत्साहन एवं बाजार देने के साथ ही जीविका लोक कलाकारों को भी अपने गांव और प्रदेश की लोककलाओं, लोक गीत एवं नृत्य के प्रदर्शन के लिए भी मंच प्रदान कर रहा है।
मुख्य सांस्कृतिक मंच पर शनिवार को सुमधुर गीतों एवं नृत्यों की धारा बही। जीविका से जुड़े कर्मियों एवं अधिकारियों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को झुमाया।नाज़िश बनी एवं शाहिद ने फूल तुम्हे भेजा है ख़त में गीत की युगल प्रस्तुति कर दर्शकों को झुमाया।फिर शुरू हुई एक से बढ़कर एक गीत एवं नृत्य की प्रस्तुतियां।दीवा एवं मेहर ने अपने नृत्य से दर्शकों मो लुभाया। वहीँ मिथिलेश, विमल, स्वास्तिक, समृद्धि संस्कृति एवं जिशांत समेत कई जीविका कर्मियों एवं उनके बच्चे-बच्चियों ने अपने गायन से दर्शकों की वाहवाही लुटी। मंच संचालन आशा कुमारी , परियोजना प्रबंधक, जीविका ने किया।
आगंतुकों को जागरूक करतने के उद्देश्य से महिला बाल विकास निगम, बिहार के तत्वाधान में विद्या केंद्र के कलाकारों द्वारा बाल विवाह एवं दहेज उन्मूलन पर आधारित लघु नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति की गई। सेमिनार हॉल में ऍफ़.पीके. सी. प्राइम, पटना द्वारा स्टॉल धारकों एवं आगंतुकों को वित्तीय साक्षरता, बचत करने, बजट बनाने एवं साइबर क्राइम से बचाव हेतु जागरूक करने के उद्देश्य से उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।रिजर्व बैंक आफ इंडिया के तत्वाधान में परचम कला केंद्र के कलाकारों ने वित्तीय साक्षरता पर आधारित पॉपेट शो का आयोजन किया गया l
पालना घर एवं फन जोन में बच्चे खूब मस्ती कर रहे हैं।फूड जोन और दीदी की रसोई स्टॉल पर आगंतुक देशी एवं पौष्टिक व्यंजनों का लुत्फ उठा रहे हैं l मुख्य द्वार पर सेल्फी जोन पर खूब फोटोग्राफी हो रही है और सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बाईस्कोप भी लोगों को अपनी और खींच रहा है।

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