
RKTV NEWS/दरभंगा(बिहार )21 दिसम्बर। शनिवार को जिला पदाधिकारी, दरभंगा कौशल कुमार की अध्यक्षता में पराली जलाने को लेकर जिला कृषि पदाधिकारी, उप-निदेशक कृषि अभियंत्रण, प्रगतिशील कृषक/किसान एवं कृषि यंत्र विक्रेता के साथ समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी द्वारा प्रराली जलाने से संबंधित किसानों के साथ विस्तृत रूप से चर्चा की गई एवं पराली प्रबंधन से संबंधित विभिन्न तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के दौरान किसानों द्वारा बताया गया कि कंबाइन हार्वेस्टर (Combine Harvester) के उपयोग के बाद धान का पराली एवं ठुढ अवशेष खेतों में रह जाने से गेहूं की बुआई में देरी हो जाती है। गेहूं की बुआई जल्द करने के लिए किसानों द्वारा पराली जलाने से विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा होती है।
जिला कृषि पदाधिकारी एवं उप-निदेशक कृषि अभियंत्रण द्वारा बताया गया कि रोटरी मल्चर, सुपर सीडर, बेलर, हैप्पी सीडर का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा रोटरी मल्चर एवं सुपर सीडर के क्रय करने पर 80% तक अनुदान की व्यवस्था भी की गई है।
उन्होंने कहा कि कंबाइन हार्वेस्टर की जगह रीपर कम बाईंडर का इस्तेमाल करके बेहतर फसल अवशेष प्रबंधन किया जा सकता है।
जिलाधिकारी ने किसानों से अपील किया कि खेतों में फसल अवशेष जलाने के बदले खेत की सफाई हेतु बेलर मशीन का प्रयोग, वर्मी कंपोस्ट बनाने एवं मिट्टी में मिलने पलवार (मल्चिंग) विधि से खेती आदि में व्यवहार कर मिट्टी को बचाएं। इस प्रकार संधारणीय कृषि पद्धति में अपना योगदान दें।
उन्होंने कहा की फसल अवशेष को जलाने से मिट्टी का तापमान बढ़ने के कारण मिट्टी में उपलब्ध सूक्ष्म जीवाणु, केंचुआ आदि मर जाते हैं जिससे फसल की उत्पादन क्षमता घट जाती है । साथ ही जैविक कार्बन जो पहले से ही हमारी मिट्टी में काम है और भी जलकर नष्ट हो जाता है। फलस्वरुप मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है।
उन्होंने कहा कि पुआल नहीं जलाकर – स्ट्रा बेलर, हैप्पी सीडर, जीरो टिल सीड कम फर्टीलाईजर ड्रिल, रीपर कम बाईंडर, स्ट्रॉ रीपर, रोटरी मल्चर कृषि यंत्र का पुआल प्रबंधन में उपयोग करें।
