
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)21 दिसंबर। स्थानीय चंदवा मोड़ लक्ष्मी नगर में आयोजित श्रीरुद्र महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के प्रथम दिन प्रवचन करते हुए प्रख्यात भागवत-वक्ता आचार्य डॉ भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि सृष्टि के मूल वेद हैं।महाप्रलय की दशा में भगवान् श्रीमन्नारायण को उनकी विरुदावली सुनाकर भगवान् वेद ही उन्हें जगाते हैं तब सृष्टि का आरंभ होता है।उन वेदों में वर्णित धर्म को ही धर्म कहा जाता है क्योंकि वह धर्म संपूर्ण प्राणियों का पोषण तथा कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। धर्म सृष्टि को धारण करता है। यह सबके हित के लिए पुरुषार्थ प्रकट करता है।इसे धर्मवृषभ के रूप में जाना जाता है। इसके ऊपर कल्याणस्वरूप सच्चिदानंद परमात्मा भगवान् शिव आरूढ़ रहते हैं। वेदों से प्रकट होने के कारण इसे वैदिक धर्म और शाश्वत होने के कारण सनातन धर्म कहा जाता है। उन्होंने कहा कि धर्म राष्ट्र का भी प्राण है। हमारे आर्यावर्त के जिन हिस्सों में वैदिक धर्म दुर्बल हुआ वे भूभाग हमसे कटते गए। बांग्लादेश में जारी हिंसा तथा भारत-विरोधी अराजकता की भर्त्सना करते हुए आचार्य ने कहा कि एकमात्र वैदिक सनातन धर्म ही विश्व शांति का साधन है।
उन्होंने कहा कि भागवत माहात्म्य में कहा गया है कि भगवान श्रीराम-कृष्ण और उनकी मंगलमयी कथाएं ही धर्म की रक्षा करती हैं। किंतु कलिकाल में धर्म का स्वरूप भी शुद्ध नहीं बचता।गाय में,अन्न-जल,ओषधि, वनस्पतियों, दूध-घी आदि सभी पौष्टिक तत्त्वों में भी कलि ने सांकर्य दोष और विष मिश्रित कर दिया है।
कथा-कीर्तन में भी सांकर्य दोष उत्पन्न कर कलिकाल ने धर्म के साधनों को भस्मीभूत तथा प्राणियों के सुख को समाप्त कर दिया है। ऐसे में परंपराप्राप्त तपस्वी आचार्यों-संतों के सानिध्य में श्रीमद्भागवत जैसे महापुराण का श्रवण एकमात्र समाधान है। इस अवसर पर यज्ञाचार्य पं दिनेश शुक्ल, गृहस्थ आश्रम बरजा के संत त्रिलोकी बाबा, यजमान वाल्मीकि तिवारी एवं वशिष्ठ तिवारी ने जलयात्रा, पंचांगपूजन, श्रीमद्भागवत पुराण पूजन आदि संपन्न कराया।मूल पाठ पं राकेश तिवारी तथा भजन-कीर्तन बच्चन मिश्र की टोली ने किया। कार्यक्रम २६ दिसंबर तक चलेगा।
