
आरा/भोजपुर( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)12 दिसंबर।बढ़ते प्रदूषण का असर अब आरा के पर्यावरण पर प्रभाव डाल रहा है। इसका असर इतना बढ़ते जा रहा है कि अगर समय रहते इसको कंट्रोल नहीं किया गया तो सांस लेना भी मुश्किल हो जाएगा।
आजकल आंखों में जलन, सांस लेने में भारीपन ,दम फूलना,जलन और बढ़ते रोग,चर्म रोग, आदि
मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि हवा में घुला जहर है। आरा शहर की हवा अब इतनी खराब हो चुकी है कि इसने प्रदूषण के मामले में राजधानी पटना को भी पीछे छोड़ दिया है।
रेड जोन की तरफ बढ़ रहा आंकड़ा डराने लगे हैं।भोजपुर जिले का मुख्यालय आरा अब ‘गैस चेंबर’ बनने की राह पर है। नवंबर तक जो हवा ‘ग्रीन जोन’ में थी, वो अब तेजी से खतरनाक स्तर पर पहुंच रही है। आंकड़ों पर नजर डाले तो
आरा का AQI: 298 (खराब स्थिति, पटना का AQI: 214,छपरा का AQI: 284 और बक्सर का AQI: 239
है।आरा की हवा आसपास के सभी बड़े शहरों से ज्यादा प्रदूषित थी। यह आंकड़ा 300 के करीब पहुंच गया है, जो ‘रेड जोन’ यानी खतरनाक स्थिति की दहलीज है।
अचानक हवा खराब होने के पीछे दो बड़ी वजहें सामने आई हैं बढ़ती ठंड- तापमान गिरने से प्रदूषण हवा में नीचे ही जमा हो रहा है।
शहर में खुलेआम निर्माण कार्य बिना ढके ही करायें जा रहे हैं।जगह-जगह अपार्टमेंट और मकान बन रहे हैं। निर्माण सामग्री रखने से धूल कण हवा में जहर घोल रहे हैं।इस जहरीली हवा सबसे ज्यादा घर के बुजुर्गों और बच्चों को नुकसान पहुंचा रही है। अगर यही हाल रहा तो अस्थमा और सांस के मरीजों की संख्या अस्पतालों में बढ़ सकती है।इसके लिए नगर निगम को सड़कों पर पानी का छिड़काव शुरू करना चाहिए और निर्माण कार्यों पर सुरक्षा मानकों का पालन सख्ती से करवाना चाहिए। जिला प्रशासन को जनहित में शक्ति का प्रयोग करना और दंड का भी सहारा लेना पड़ेगा ताकि आम लोगों की जिंदगी को सुरक्षित रखा जा सके।ऐसे लोगों पर जुर्माना लगाना चाहिए?
