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56वें आईएफएफआई में एनएफडीसी-एनएफएआई द्वारा पुनर्स्थापित मूक फिल्म ‘मुरलीवाला’ की विशेष स्क्रीनिंग।

मूक युग के जीवंत संगीत अनुभव के साथ दर्शक पहुंचे 1920 के दशक में।

राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन (एनएफएचएम) के तहत सावधानीपूर्वक पुनर्स्थापित 18 क्लासिक फिल्मों को भारतीय पैनोरमा विशेष पैकेज के हिस्से के रूप में संजोया गया।

RKTV NEWS/ नई दिल्ली 24 नवंबर।आईएफएफआई के चौथे दिन सिने प्रेमियों के लिए समय-यात्रा अदभूत अनुभव रहा, जब बहाल की गई क्लासिक फिल्म ‘मुरलीवाला’ का विशेष प्रदर्शन किया गया। राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) और राष्ट्रीय फिल्म अभिलेखागार (एनएफएआई) ने राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन (एनएफएचएम) के तहत 18 क्लासिक फिल्मों को नया जीवन दिया है और इन्हें इस वर्ष के आईएफएफआई के लिए इंडियन पैनोरमा विशेष पैकेज के रूप में संजोया है। इस पैकेज में हिंदी, तेलुगु, मलयालम, बांग्ला और मराठी की क्लासिक कृतियों को शामिल किया गया है, जो विविध कलात्मक अभिव्यक्तियों को दर्शाती हैं। इन्हें सख्त अभिलेखीय मानकों के अनुसार संरक्षित किया गया है और प्रत्येक फिल्म की मौलिक रचनात्मक दृष्टि को सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखा गया है।
मुक युग का पुनर्सृजन
एनएफडीसी के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदुम ने इस स्क्रीनिंग के उद्देश्य के बारे में बताया। उन्होंने कहा, ” विचार यह है कि आज की पीढ़ी के लिए मूक फिल्मों के अनुभव को पुनर्जीवित किया जाए, जहां संगीतकार अग्रिम पंक्ति में बैठकर दर्शकों के लिए लाइव संगीत प्रस्तुत करते थे। और प्रतिभाशाली राहुल जी के नेतृत्व में मुझे यकीन है कि यह क्षण को उसी भावना और भव्यता के साथ जीवंत हो उठेगा जिसका यह हकदार है।”
संगीतकार राहुल रानाडे ने कहा, “98 साल पहले बनी एक फिल्म का संगीत फिर से तैयार करना और उसका लाइव प्रदर्शन करना मेरे और मेरी पूरी टीम के लिए एक बड़े सम्मान और चुनौती की बात थी। आप बाबूराव जी द्वारा 1927 में बनाई गई फिल्म और उनके द्वारा रचे गए विशेष प्रभाव का अनुभव करने जा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि मैं और मेरी टीम इसके साथ न्याय कर पाएंगे।”
गौरतलब है कि दिवंगत फिल्म निर्माता और कलाकार बाबूराव पेंटर द्वारा बनाई गई “मुरलीवाला” (1927), जो भारत की बहुत कम बची हुई मूक फिल्मों में से एक है और एनएफएचएम की सबसे दुर्लभ खजानो में से एक है। यह प्रदर्शन 1920 के दशक के फिल्म प्रस्तुती अनुभवों को पुनः जीवंत करता है। यह भी उल्लेखनीय है कि इस स्क्रीनिंग में बाबूराव पेंटर की दोनों बेटियां भी शामिल हुईं।
एक औपचारिक उत्सव वर्ष
इस वर्ष का चयन (क्यूरेशन) गहरा ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि यह वी. शांताराम की 125 वर्षों की विरासत का सम्मान करता है और साथ ही गुरुदत्त, राज खोसला, ऋत्विक घटक, भूपेन हज़ारिका, पी. भानुमति, सलिल चौधरी और के. वैकुंठ की पथप्रदर्शक प्रतिभाओं को शताब्दी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। यह महोत्सव एनएफडीसी के 50 वर्षों का भी जश्न मना रहा है, जो आधुनिक भारतीय सिनेमा के परिदृश्य को आकार देने में इसकी परिवर्तनकारी भूमिका को मान्यता देता है। श्याम बेनेगल की ‘सुसमन’ को दी गई विशेष श्रद्धांजलि भारतीय कहानी कहने की कला पर इस दूरदर्शी फ़िल्म निर्माता के अमिट प्रभाव को रेखांकित करती है।

राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन

नवंबर 2016 में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया राष्ट्रीय फिल्म विरासत मिशन भारत के सबसे महत्वकांक्षी और महत्वपूर्ण उपक्रमों में से एक है। इसका उद्देश्य भारत की सिनेमाई विरासत की रक्षा करना है— जिसमें कैमरा नेगेटिव और रिलीज़ प्रिंट से लेकर दुर्लभ अभिलेखीय खज़ानों तक, जो अधिकार-धारकों, संग्रहकर्ताओं और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों से प्राप्त किए गए है, उनका संरक्षण, संवर्धन , डिजिटलीकरण और पुनर्स्थापन सुनिश्चित करना शामिल हैं।
आईएफएफआई 2025 के लिए पुनर्स्थापित भारतीय फिल्में इस सावधानीपूर्वक प्रयास का प्रमाण हैं, जहां प्रत्येक फ्रेम को बड़ी मेहनत से पुनर्स्थापित किया गया है और सटीकता के साथ कलर-ग्रेड किया गया है, अक्सर फिल्म निर्माताओं, छायाकारों या उनके करीबी सहयोगियों के मार्गदर्शन में।
महोत्सव का एक मुख्य आकर्षण ऋत्विक घटक द्वारा पुनर्स्थापित ‘सुबर्णरेखा’ है, जिसे एनएफडीसी-एनएफएआई संग्रह में 35 मिमी मास्टर पॉजिटिव से नया जीवन प्रदान किया गया है, जिसमें अंतिम कलर ग्रेडिंग छायाकार अविक मुखोपाध्याय की देखरेख में की गई है।
मुजफ्फर अली की ‘उमराव जान’, जिसे मूल निगेटिव के अपरिवर्तनीय रूप से खराब होने के बाद एक संरक्षित 35 मिमी रिलीज प्रिंट से पुनर्स्थापित किया गया है, की ग्रेडिंग प्रक्रिया में अली का व्यक्तिगत प्रयावेक्षण शामिल रहा है, यह सुनिश्चित करते हुए कि फिल्म की विशिष्ट रंगीन सुंदरता को ईमानदारी से बरकरार रखा जाए।
इन पुनर्स्थापनों से भारतीय सिनेमा के महान फिल्मकारों की विरासत को सम्मान मिलता है और यह सुनिश्चित होता है कि नई पीढ़ीया इन कृतियों में निहित सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और कलात्मक आख्यानों से जुड़ी रहें।

भारतीय पैनोरमा विशेष पैकेज के लिए चयनित पुनर्स्थापित फिल्मों की सूची

उमराव जान (मुजफ्फर अली – हिन्दी/145 मिनट/ 4के डीसीपी)
मल्लीस्वरी (बीएन रेड्डी/तेलुगु/175 मिनट/4के डीसीपी)
रुदाली (कल्पना लाजमी/हिन्दी/128 मिनट/4के डीसीपी)
गमन – (मुजफ्फर अली/हिन्दी/119 मिनट/4के डीसीपी)
डर (ऋत्विक घटक/हिन्दी/18 मिनट/4के डीसीपी)
सुबर्णरेखा (ऋत्विक घटक/बांग्ला/143 मिनट/4के डीसीपी)
मुरलीवाला – (बाबूराव पेंटर/ साइलेंट/ 45 मिनट)
पार्टी (गोविंद निहलानी/हिंदी/118 मिनट/2के डीसीपी)
सीआईडी (राज खोसला/हिन्दी/146 मिनट/4के डीसीपी)
प्यासा (गुरुदत्त/हिन्दी/146 मिनट/4के डीसीपी)
एक डॉक्टर की मौत (तपन सिन्हा/हिन्दी/122 मिनट/4के डीसीपी)
एक होता विदूषक (जब्बार पटेल/मराठी/168 मिनट/4के डीसीपी)
किरीदम (सिबी मलयिल/मलयालम/124 मिनट/4के डीसीपी)
डॉ. कोटनिस की अमर कहानी (वी. शांताराम/Hindi/ 100 Mins/ 2K DCP)
सुस्मान (श्याम बेनेगल/हिन्दी) / 140 Mins/ 2K DCP)
मुसाफिर (ऋषिकेश मुखर्जी) / Hindi/127 Mins/ 4K DCP)
शहीद (रमेश सहगल/हिन्दी/1948/4के डीसीपी)
गीतांजलि (मणिरत्नम/तेलुगु/137 मिनट/4के डीसीपी)

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