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जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 105वें स्थापना दिवस पर एनईपी-2020 के क्रियान्वयन पर मंथन।

RKTV NEWS/नई दिल्ली, 30 अक्टूबर।जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) के 105वें स्थापना दिवस समारोह के तहत आज विश्वविद्यालय के सामाजिक कार्य विभाग ने “एनईपी-2020 की संभावनाएँ” विषय पर एक उच्चस्तरीय पैनल चर्चा आयोजित की। यह आयोजन विभाग की वार्षिक “एस. आर. मोहसिनी स्मृति व्याख्यान श्रृंखला” के अंतर्गत विश्वविद्यालय के डॉ. एम. ए. अंसारी सभागार में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर विशिष्ट पैनल में शामिल थे — प्रो. अनिल डी. सहस्रबुद्धे (अध्यक्ष, NETF, NBA, NIRF एवं EC NAAC), प्रो. ममिडाला जगदीश कुमार (पूर्व अध्यक्ष, यूजीसी एवं पूर्व कुलपति, जेएनयू), और प्रो. डी. पी. अग्रवाल (पूर्व अध्यक्ष, संघ लोक सेवा आयोग)। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. मज़हर आसिफ, कुलपति, जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने की। इस अवसर पर प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी, रजिस्ट्रार, जामिया भी उपस्थित रहे।
अपने स्वागत भाषण में प्रो. रिज़वी ने भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge Systems) को शिक्षा में समाहित करने की आवश्यकता पर बल दिया और मातृभाषा में शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया।
प्रो. ममिडाला जगदीश कुमार ने अपने विचार “एनईपी: मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट – द स्पिरिट बिहाइंड एनईपी 2020” विषय पर व्यक्त करते हुए कहा कि शोध और नवोन्मेष की भावना तभी विकसित हो सकती है जब विद्यार्थियों में जिज्ञासा और आलोचनात्मक सोच को प्रोत्साहन दिया जाए। उन्होंने कहा, “एनईपी लागू करने का सबसे उपयुक्त समय अभी है ताकि हम एक स्थायी और नवाचारी भारत का निर्माण कर सकें।”
प्रो. डी. पी. अग्रवाल ने कहा कि एनईपी-2020 की सफलता में शिक्षक सबसे प्रमुख भूमिका निभाते हैं। उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए निरंतर री-स्किलिंग, अप-स्किलिंग और लाइफलॉन्ग लर्निंग की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि “एनईपी का उद्देश्य शिक्षा में मूल्यवर्द्धन है और यह तभी संभव है जब शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनें।”
प्रो. अनिल डी. सहस्रबुद्धे ने जामिया की शताब्दी से अधिक पुरानी गौरवशाली यात्रा की सराहना की और कहा कि जामिया का बहुविषयक (multidisciplinary) स्वरूप एनईपी की भावना से पूर्णतः मेल खाता है। उन्होंने कहा कि “शोध और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना और शिक्षकों को विद्यार्थियों के ‘मित्र, दार्शनिक और मार्गदर्शक’ की भूमिका में स्थापित करना समय की आवश्यकता है।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ ने सभी विशिष्ट वक्ताओं को — जिन्हें उन्होंने अपने गुरु और मार्गदर्शक कहा — धन्यवाद ज्ञापित किया और यह विश्वास जताया कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया एनईपी-2020 के सभी आयामों को पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ लागू करेगा। उन्होंने कहा कि जामिया गांधीवादी मूल्यों पर आधारित शिक्षा प्रणाली का पालन करता है और यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक विद्यार्थी किसी न किसी कौशल (skill) के साथ विश्वविद्यालय से स्नात कर सके।

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