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भोजपुर:शिक्षकों को इंसान बनने हेतु समिति शिक्षकों को देती है सम्मान : डॉक्टर प्रतीक

शिक्षक राष्ट्र के शिल्पी होते हैं : डा जे बी पाण्डेय

आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)06 सितंबर।शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर प्रतिभा खोज समिति कोईलवर प्रखंड भोजपुर आरा के तत्वावधान में श्री हरखेन कुमार जैन ज्ञान स्थली आरा के सभागार में डा प्रभा सिन्हा शिक्षक सम्मान समारोह 2025 का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो नंदजी दूबे ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि व अन्य के रूप में सिविल सर्जन डा शिवेन्द्र कुमार सिन्हा, मनोज कुमार सुधांशु डीएसपी, मुख्य वक्ता डा जंग बहादुर सिन्हा, पद्मश्री डा भीम सिंह भवेश, आनंद मोहन सिन्हा सामुहिक दीप प्रज्ज‌‌‌वलन व पूर्व राष्ट्रपति डा सर्व पल्ली डा राधा कृष्णन व मां सरस्वती पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि से हुआ।स्वागत भाषण समिति के अध्यक्ष डा प्रतीक द्वारा किया गया। समिति के उद्देश्य को रखते हुए इन्होंने बताया की 1994से गरीब और मेधावी छात्र-छात्राओं को आर्थिक सहायता किया जाता है।विगत तीन वर्षों से डा प्रभा सिन्हा शिक्षक सम्मान एकादश हजार रुपए की राशि समिति द्वारा निर्धारित मानदंडों पर पर चयनित शिक्षक को ही दिया जाता है। जिसमें कंचन कामिनी, ज्योति राज,डा नथुनी पांडेय तथा डा उमेश राय रहै।इसके अतिरिक्त शिक्षण कार्य में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए पद्मश्री डा भीम सिंह भावेश, डॉक्टर अर्चना सिंह, डॉक्टर संजय कुमार, कल्पना श्रीवास्तव, डॉक्टर आदित्य तिवारी, चांदनी कुमारी , चन्द्र शेखर सिंह,रूपा कुमारी, सरबजीत कुमार, सत्यनारायण राय को मोमेंटो, अंगवस्त्र एवं समुचित राशि दी गई अतिथि के हाथों हस्तगत कराया गया।
मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए डा जंग बहादुर पाण्डेय ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र के शिल्पी होते हैं।उनकी गोद में निर्माण और प्रलय दोनों पलते हैं।डा आनंद मोहन सिन्हा भोजपुर के अल्फ्रेड नोबेल हैं,जो अपनी सेवा निवृत लाभांश की व्याज से प्रत्येक वर्ष 51 हजार का पुरस्कार देते हैं।उनके दोनों सुपुत्र डा पीयूष कुमार और डा प्रतीक इस पुनीत यज्ञ में उनका खुलकर साथ देते हैं।आज के इस भौतिक वादी युग में ऐसा लायक सुपुत्र होना दुर्लभतम है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि किसी देश का भविष्य वहां के नागरिकों पर , नागरिकों का भविष्य वहां की शिक्षा पर और शिक्षा का भविष्य वहां के शिक्षकों पर निर्भर करता है। अतः शिक्षक का सम्मान राष्ट्र निर्माता का सम्मान है।
समारोह का उद्घाटन करते हुए भोजपुर आरा के सिविल सर्जन डा शिवेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा है मैं इस शिक्षक सम्मान समारोह का उद्घाटन करते हुए गौरव का अनुभव कर रहा हूं, क्योंकि शिक्षक का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है।मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय भोजपुर आरा के पूर्व दर्शन शास्त्र के विभागाध्यक्ष डा महेश सिंह ने कहा कि आदर्श शिक्षक होना बहुत कठिन है। भारत के पूर्व राष्ट्रपति डा सर्वपल्ली राधाकृष्णन् केवल दर्शन शास्त्र के विद्वान ही नहीं थे अपितु एक उच्च कोटि के आदर्श शिक्षक थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में पद्मश्री डा भीम सिंह भवेश ने कहा कि किसी राष्ट्र के विकास का मूलाधार शिक्षा है और शिक्षक राष्ट्र के निर्माता होते हैं।
विशिष्ट अतिथि के रूप में मनोज कुमार सुधांशु ने कहा की शिक्षक भगवान से भी होते हैं। वैसे माता पिता की श्रेणी उपर है। शिक्षक को ड्यूटी समझकर नहीं बल्कि सेवा भाव समझकर राष्ट्र की सेवा करें
इस अवसर पर डा विभा कुमारी,डा बलिराज ठाकुर, डा जीतेन्द्र शुक्ला सरोज,डा लक्ष्मी कुमारी,पुलिस उपाधीक्षक मनोज कुमार सुधांशु,डा प्रभा सिन्हा प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर्ता शिक्षक डा नवीन कुमार, अधिवक्ता देवेंद्र कुमार डा सत्यनारायण राय ,डा मुक्तेश्वर उपाध्याय ,डा मदनमोहन द्विवेदी,डा किरण कुमारी, शुशील तिवारी नंदजी सिंह आदि ने सर्व पल्ली राधाकृष्णन के व्यक्तित्व और कृतित्व पर गहन प्रकाश डाला।समारोह की अध्यक्षता करते हुए साहित्य मनीषी एवं वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डा नंदजी दूबे ने कहा कि शिक्षक दिवस मनाना पाश्चात्य संस्कृति की देन है।हमारे यहां गुरु पूर्णिमा दिवस मनाने की परंपरा है। भारत संतों और गुरुओं का देश है। आचार्य देवो भव ,मातृ देवो भव,पितृ देवो भव, अतिथि देवो भव की परंपरा भारत की सनातन संस्कृति की देन है।डा आनंद मोहन सिन्हा प्रत्येक वर्ष 51 हजार का सम्मान शिक्षकों को देकर सम्मानित कर उनका हौसला बढ़ाते हैं और समाज एवं राष्ट्र निर्माण के लिए उन्हें प्रेरित करते हैं।इस अवसर पर मंचस्थ अतिथियों द्वारा डा आनंद मोहन सिन्हा रचित पुस्तक लोकाराधना का लोकार्पण भी हुआ और उसकी भूरिश: प्रशंसा हुई।संगोष्ठी के संयोजक डा दिनेश प्रसाद सिन्हा ने सम्मानित शिक्षकों के चयन के औचित्य पर प्रकाश डाला जबकि इस सम्मान समारोह के जनक एवं व्यवस्थापक डा आनंद मोहन सिन्हा ने डा प्रभा सिन्हा सम्मान की परिकल्पना और नियम परिनियम पर गहन प्रकाश डाला।आगत अतिथियों का भव्य स्वागत डा आनंद मोहन सिन्हा के सुपुत्र डा प्रतीक ने, सरस्वती वंदना मौसिमी कुमारी ने समवेत संचालन डा दिनेश प्रसाद सिन्हा एवं डा मनोज सिंह ने और धन्यवाद ज्ञापन शुभम् कुमार ने किया। राष्ट्रगान से पूर्णाहुति हुई।

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