आपदा और जलवायु संकट से निपटने में राज्यों की भूमिका पर राष्ट्रीय सम्मेलन।
RKTV NEWS/पटना(बिहार )3 सितंबर। “आपदाओं को ध्यान में रखकर ही हमें विकास की हर योजनाओं को मूर्त रूप देना होगा। आपदाएं घटित होंगी। जलवायु परिवर्तन की वजह से आनेवाले दिनों में इसकी प्रकृति और आवृत्ति में विस्तार ही होगा। दूसरी तरफ विकास का पहिया भी निरंतर चलता रहेगा। ऐसे में हमें इन दोनों के साथ मिलकर चलना होगा। आपदाओं की वजह से हर वर्ष हजारों हजार करोड़ का नुकसान होता है। विकास की सभी योजनाओं में आपदा प्रबंधन एक अभिन्न हिस्सा बने।” राज्य के जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने उक्त बातें यहां ज्ञान भवन में आज जलवायु परिवर्तन पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में कही। सम्मेलन का आयोजन बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने संयुक्त रूप से किया था। इसका उद्घाटन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ उदय कांत, सदस्य पी.एन. राय, कौशल किशोर मिश्र, नरेंद्र कुमार सिंह एवं प्रकाश कुमार और आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
पृष्ठभूमि
जलवायु परिवर्तन एक वैश्विक चुनौती के रूप में हमारे सामने खड़ा है। मौसम चक्र बदल रहा है। देश ही नहीं दुनिया भर में प्राकृतिक आपदाएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल में देश के पहाड़ी राज्यों में बादल फटने व भूस्खलन जैसी घटनाओं में असमय ही कई लोग मौत के शिकार हो गए। बाढ़ एवं अतिवृष्टि ने बिहार समेत कई प्रदेशों में तांडव मचाया। विकराल होती इस समस्या के समाधान की दिशा में हालांकि बिहार सरकार ने कई कदम उठाए हैं। लड़ाई लंबी है। शासन के दृढ़ संकल्प और आमजन की सामूहिक भागीदारी से यह संभव है। पर्यावरण अनुकूल नीतियों का क्रियान्वयन सरकार की प्राथमिकता है। जल-जीवन-हरियाली मिशन हो या कृषि रोडमैप का क्रियान्वयन, बिहार ने हमेशा राह दिखाई है। वैश्विक स्तर पर सरकार के इन प्रयासों की सराहना मिली है।
बिहार ने इस दिशा में जो महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, उनमें प्रमुख हैं – जलवायु अनुकूल योजनाओं का निर्माण, पंचायत स्तर तक के पूर्वानुमानों के साथ स्थानीय चेतावनी प्रणाली और शहरी व ग्रामीण प्रशासन में आपदा जोखिम न्यूनीकरण का समावेश। यू.एन.डी.पी. और प्राधिकरण मिलकर बिहार में आपदा जोखिम कम करने और जलवायु लचीलापन बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। विभागीय समन्वय बढ़ाना और सामुदायिक स्तर पर तैयारी को मजबूत करना भी इसमें शामिल है।
सम्मेलन का उद्देश्य
यह सम्मेलन राज्यों के नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर आपदा जोखिम कम करने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को न्यून करने और विकास योजनाओं में तालमेल बढ़ाने का अवसर देगा। भारत में बढ़ते जलवायु परिवर्तन के खतरे और आपदाओं से निपटने के लिए समाधान की दिशा में स्थानीय स्तर पर किए जाने वाले प्रयास, नवाचार और संयुक्त कार्ययोजना बेहद जरूरी हैं। यह सम्मेलन इन्हीं अनुभवों को साझा करने और नई राह तय करने का अवसर देगा। कमजोर वर्गों की जरूरतों का खास ध्यान रखा जाएगा।
मुख्य तथ्य और बिंदु
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और यू.एन.डी.पी. की साझेदारी से बिहार में बाढ़, गर्मी, बिजली गिरना जैसी चुनौतियों के लिए डेटा-आधारित योजनाएं बन रही हैं, जिससे राज्य और जिला स्तर पर जोखिम का आकलन और चेतावनी तंत्र बेहतर हुआ है।
– सम्मेलन में राज्य सरकार, तकनीकी विशेषज्ञ, संस्थाएं और समाज के प्रतिनिधि मिलकर वर्तमान रणनीतियों की समीक्षा करेंगे, विफलताओं व सफलताओं से सीखेंगे, और मिलकर आगे की राह बनाएंगे।
– तकनीकी नवाचारों जैसे बाढ़ मॉडलिंग, हीट एक्शन प्लान और बिजली गिरने के खतरों को कम करने के प्रयासों की चर्चा होगी, जिन्हें अन्य राज्य भी अपना सकते हैं।
– कमजोर वर्गों की भागीदारी, संस्थागत सहयोग, और नीति व योजना में समावेशिता पर विशेष जोर रहेगा, ताकि आपदा प्रबंधन जमीनी हकीकत के करीब हो सके।
– इस सम्मेलन से प्राप्त अनुभवों और सिफारिशों को राष्ट्रीय स्तर पर साझा कर, भविष्य की नीति और योजना निर्माण में उपयोग किया जाएगा।
सम्मेलन के दौरान चार तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए। इस दौरान एन. विजयलक्ष्मी, अपर मुख्य सचिव, पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग, बिहार, एम. सुनील कुमार नाइक, महानिरीक्षक, अग्निशाम सेवाएं, बिहार, डा. सी.एन. प्रभु, निदेशक, बिहार मौसम सेवा केंद्र, डॉ कमल लोचन मिश्रा, कार्यकारी निदेशक, ओड़िशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, प्रोफेसर एन. विनोद चंद्र मेनन, पूर्व सदस्य, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण सहित विभिन्न राज्यों और संस्थाओं के आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों ने इन सत्रों में अपने विचार व्यक्त किये।

