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भोजपुर:दिवंगत साहित्यकार एवं शिक्षक डॉ. श्रीराम पांडेय रचित शोध प्रबंध की पुस्तक “दूसरी परंपरा के पुरस्कर्ता आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का चिंतन एवं सृजन: एक अनुशीलन ” का लोकार्पण।

RKTV NEWS/आरा ( भोजपुर )31 अगस्त। आज जनहित सहित्य मंडल आरा के तत्वावधान में हिंदी स्वाभिमान पखवाड़ा कार्यक्रम के अंतर्गत नागरी प्रचारिणी जिला केद्रीय पुस्तकालय, रमना, आरा के पुस्तकालय कक्ष में दिवंगत साहित्यकार एवं शिक्षक डॉ. श्रीराम पांडेय रचित शोध प्रबंध की पुस्तक “दूसरी परंपरा के पुरस्कर्ता आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का चिंतन एवं सृजन: एक अनुशीलन ” का लोकार्पण साहित्यकार जगतनंदन सहाय ने किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह की अध्यक्षता वरीय अधिवक्ता लक्ष्मी नारायण राय ने किया तथा मंच का संचालन अतुल प्रकाश ने, आगत अतिथियों का स्वागत सचिव नंदकिशोर सिंह कमल ने तथा धन्यवाद ज्ञापन श्रीप्रकाश ओझा ने किया। अपने संबोधन में जगत नंदन सहाय ने कहा कि आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की आलोचना दृष्टि हिंदी साहित्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि हजारी प्रसाद द्विवेदी की आलोचनात्मक कृतियों ने हिंदी साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला और पाठकों को साहित्यिक कृतियों को समझने में मदद की। प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी साहित्य के एक प्रमुख आलोचक और निबंधकार थे। उनकी आलोचना दृष्टि व्यापक, गहन और संतुलित थी। कस्तूरी प्रशासन के प्रकाशक डॉ रवि कुमार ने नव विमोचित पुस्तक के विषय में विस्तार से चर्चा किया और कहा कि हजारी प्रसाद द्विवेदी की आलोचना दृष्टि में साहित्य के विभिन्न पहलुओं का समावेश था, जैसे कि कविता, नाटक, उपन्यास और निबंध साहित्यिक कृतियों का गहन विश्लेषण करते थे और उनके अर्थ को समझने के लिए विभिन्न दृष्टिकोणों का उपयोग करते थे।द्विवेदी जी की आलोचना दृष्टि में संतुलन था, वे किसी एक दृष्टिकोण को नहीं अपनाते थे, बल्कि विभिन्न दृष्टिकोणों का समावेश करते थे।
डॉ रेणु मिश्रा ने द्विवेदी जी के सूरदास के साहित्य पर एक विस्तृत आलोचना लिखी, जिसमें उन्होंने सूरदास की कविता की विशेषताओं का विश्लेषण किया।
डॉक्टर ममता मिश्रा ने कहां की हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कबीर की कविता पर भी एक आलोचना लिखी, जिसमें उन्होंने कबीर की कविता की विशेषताओं और उनके संदेश को समझाया।
सभा को संबोधित करने वालों में डॉ रवि कुमार, प्रदीप कुमार सिंह, प्रमोद सिंह, कृष्ण गोपाल मिश्र, डॉ रेनू मिश्रा, डॉ. ममता मिश्रा आदि प्रमुख थे। सभा में उपस्थित साहित्यकारों में अजय कुमार गुप्ता अज्ञानी जी, जन्मेजय ओझा, डॉ आरसी भूषण, डॉ कुमार शीलभद्र, सारिका, शरद सिंह, आदित्य प्रकाश, जय नारायण पांडे, विजय चंद्र पाठक, गायक धनी पांडे, डॉ. केशव प्रसाद,डॉ. जयप्रकाश सिंह बादल, जयराम सिंह, डॉ. सतनारायण पांडे आदि प्रमुख थे।
उक्त जानकारी विज्ञप्ति जारी कर नंदकिशोर सिंह कमल,सचिव,जनहित परिवार भोजपुर के द्वारा दिया गया।

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