कुलपति डॉ. लवली शर्मा ने किया ध्वजारोहण।
खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 16 अगस्त। देश के वीर शहीदों की शहादत को नमन करते हुए इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ में 79वां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया। सर्वप्रथम कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने विश्वविद्यालय के संस्थापकद्वय राजा वीरेन्द्र बहादुर सिंह एवं रानी पद्मावती देवी व उनकी सुपुत्री राजकुमारी इंदिरा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। इसके पश्चात ध्वजारोहण किया और नील गगन में गुब्बारे छोड़े। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान की प्रस्तुति दी गई।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ. शर्मा ने वीर शहीदों को नमन करते हुए कहा कि 1857 की क्रांति से लेकर भारत की आजादी तक असंख्य वीरों ने अपने बलिदान दिए हैं। यह आजादी का पर्व हमें स्मरण कराता है कि दासता मृत्यु से भी दाहक होती है। लाल-बाल और पाल, महात्मा गांधी, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुभाषचंद्र बोस और न जाने कितने ही अनगिनत वीरों ने सर्वस्व न्यौछावर किया, जिससे कि हम स्वतंत्र देश में सांस ले सकें। हमारी स्वतंत्रता का अभिप्राय मात्र अंग्रेजों के शासन से मुक्त होना नहीं था, अपितु यह एक नए भारत के निर्माण का संकल्प था। एक ऐसा भारत जहां हर नागरिक को समानता, न्याय और सम्मान मिले। पिछले 78 सालों में हमने निरंतर प्रगति की है। हम कृषि, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और खेल जगत सहित विभिन्न क्षेत्रों में नई-नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी है। एक भारतवासी के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम अपने देश के विकास में योगदान दें। हमें शिक्षित होकर, जिम्मेदार नागरिक बनकर और अपने समाज में सकारात्मक बदलाव लाकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
इस दौरान कुलपति डॉ. शर्मा ने विश्वविद्यालय में हो रहे नवाचार की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में नवाचार अंतर्गत 10 दिवसीय “ग्रीष्मकालीन कलात्मक शिविर” (निःशुल्क समर कैम्प) का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय की प्रगति हेतु विभिन्न संस्थानों यथा शासकीय नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय डोंगरगढ़, दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर, भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय लखनऊ, डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के साथ एम.ओ.यू. किया गया है। निःसंदेह इस एम.ओ.यू. से भारतीय कला एवं संस्कृति का विस्तार होगा और युवाओं को भारतीय कला एवं संस्कृति को जानने तथा समझने का अवसर भी मिलेगा। विश्वविद्यालय में इस सत्र से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षकों के अथक प्रयास से लागू हो गया है।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. राजन यादव, अधिष्ठाता लोक संगीत एवं कला संकाय ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठातागण, शिक्षकगण, अधिकारीगण, संगतकारगण, कर्मचारीगण तथा शोधार्थी–विद्यार्थी उपस्थित थे।
संगीत संकाय के विद्यार्थियों ने देशभक्तिपरक गीतों से मन मोहा
कार्यक्रम के अंत में अधिष्ठाता प्रो. डॉ. नमन दत्त के मार्गदर्शन में संगीत संकाय के विद्यार्थियों ने देशभक्तिपरक गीतों की प्रस्तुति से मन मोहा। इन विद्यार्थियों में प्रथा, प्रिया, साक्षी, सुप्रिया, वरिसिता, रीना, शिवांगी, श्रुति, शीतल, कुशांगी, शगुन, सूरजोदीप, प्रियांशु, निखिल आनंद, अंशुल, श्रीवास, रिशि, कुणाल ने सुमधुर स्वर में अपनी प्रस्तुति दी। विवेक और नेहरू (तबला), पुलकित और आर्यन (की-बोर्ड), असिधारा (सितार), मानस (वायलिन), मयंक (गिटार), सन्नी (आक्टोपैड), रौनक (काजोन) और अनिकेत (हारमोनियम) ने संगत किया।
फतेह मैदान के मुख्य कार्यक्रम में लोक संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने दी मनमोहक प्रस्तुति
जिला मुख्यालय स्थित राजा फतेह सिंह खेल मैदान में आयोजित जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के लोक संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने लोक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों की मनमोहक प्रस्तुति पर उन्हें अतिथियों द्वारा सम्मानित भी किया गया।


