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लखीसराय:सतत जीविकोपार्जन योजना और ग्रामीण बिहार में रोजगार सृजन।

RKTV NEWS/लखीसराय(बिहार )25 जुलाई।सरकार की महत्वाकांक्षी एवं जीविका द्वारा संचालित सतत जीविकोपार्जन योजना ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन में अहम् भूमिका अदा की है l कल तक गरीबी रेखा से नीचे गुजर –बसर कर रहे परिवार इस योजना से जुड़कर आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति की ओर अग्रसर हैं l सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के अत्यंत ही गरीब परिवार की महिला मुखिया सतत जीविकोपार्जन योजना से लाभान्वित होकर सफल उद्यमी बन रही है।
गाँव से लेकर शहर तक के अत्यंत गरीब परिवारों के महिला मुखिया को ग्राम संगठन के अनुमोदन के बाद योजना से जोड़कर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराते हुए उनकी गरीबी दूर की जा रही है l चिन्हित परिवारों को वित्तीय सहयोग देते हुए सूक्ष्म व्यवसाय , गब्य , बकरी एवं मुर्गी पालन से जोड़ा गया है l सिलाई केंद्र, किराना दुकान, मनिहारी दुकान , सब्जी और फल दुकान, ब्यूटी पार्लर, खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित व्यवसाय, मिठाई दुकान समेत उनके रुचि के अनुरूप कराए गए व्यवसाय ने रोजगार संवर्धन में बड़ी भूमिका अदा की है और इसके सापेक्षित परिणाम भी मिले हैं। वित्तीय पोषण, मार्गदर्शन , प्रशिक्षण एवं उसके बाद किये गए रोजगार के व्यापक परिणाम मिले हैं l देशी शराब एवं ताड़ी के उत्पादन एवं बिक्री में पारंपरिक रूप से जुड़े अत्यंत निर्धन परिवार तथा अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य समुदायों के लक्षित अत्यंत निर्धन परिवार अब आत्मसम्मान के साथ रोजगार कर रहे हैं। गरीब परिवार अब आर्थिक स्वावलंबन के साथ ही समाज में मान-सम्मान भी पा रहे हैं l गरीबी उन्मूलन एवं आर्थिक एवं सामाजिक उन्नति की प्रक्रिया रोजगार उपलब्ध कराते हुए गरीबी उन्मूलन हेतु निरंतर जारी जारी है l
सतत जीविकोपार्जन योजना बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति, जीविका द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में 26 अप्रैल 2018 से संचालित हैं l परत दर परत वित्तीय पोषण एवं रोजगार संवर्धन से गरीबी दूर हो रही है l बदलाव की बयार गरीबी उन्मूलन एवं नशा उन्मूलन में बह रही है l योजन से लाभान्वित परिवारों को राशन कार्ड से लेकर बी.पी.एल कार्ड समेत कई सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है l
बिहार सरकार द्वारा की सतत आजीविका, क्षमता निर्माण एवं वित्तीय सहायता के माध्यम से सामाजिक बदलाव एवं आर्थिक सशक्तिकरण हेतु सतत जीविकोपार्जन योजना संचालित है l कल तक समाज की मुख्य धारा से वंचित अत्यंत गरीब परिवार अब मुख्य धारा में शामिल होकर आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान की ओर निरंतर अग्रसर है l ये वो परिवार हैं जो देशी शराब निर्माण एवं ताड़ी व्यवसाय से जुड़े हुए थे l अब वही परिवार सतत जीविकोपार्जन योजना से जुड़कर अपने रूचि के अनुरूप रोजगार करते हुए समाज के विकास में अब अपना योगदान दे रहे हैं । रोजगार के तहत राज्य की पारंपरिक लोक कलाओं एवं कलाकृतियों का निर्माण करते हुए उसके बिक्री राष्ट्रीय स्तर के बाजारों में करते हुए शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं। राज्य में रोजगार संवर्धन का यह एक बड़ा उदाहरण है जहां लोककलाएं पुनर्जीवित तो हो ही रही हैं गरीब कलाकारों को रोजगार भी मिला हैं।
वित्तीय वर्ष 23-24 से अब सतत जीविकोपार्जन योजना के अंतर्गत सतत जीविकोपार्जन योजना के अंतर्गत चयनित परिवारों को दो लाख रुपये देने का प्रावधान भी किया गया है जिससे रोजगार भी बढ़े हैं और उनका आकार भी बढ़ा है ।
बिहार की तस्वीर बदली है l इसके पीछे कड़ी मेहनत और पूरी पारदर्शिता से अत्यंत गरीब परिवार का चयन कारगर कदम रहा है l बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) द्वारा संचालित सतत जीविकोपार्जन योजना ने उन्हें जीने की राह दिखाई एवं सिखाई है और रोजगार संवर्धन से गरीबी उन्मूलन में मदद मिली है।
सतत जीविकोपार्जन योजना से लाभान्वित होकर हजारों परिवार गरीबी रेखा से बाहर निकलकर आर्थिक एवं सामाजिक सम्पन्नता की ओर अग्रसर हैं l स्वरोजगार करते हुए लाभान्वित परिवार की मासिक आमदनी 10 हजार रुपये से भी ज्यादा है l उनकी परिसंपत्ति महज तीन से चार साल में लाख रुपये से ज्यादा हुई है l सतत जीविकोपार्जन योजना से लाभान्वित महिलाओं की पहचान लखपतिया दीदी के रूप में बन रही है l सामाजिक परिवर्तन के तहत यह एक मौन क्रांति है l
सतत जीविकोपार्जन योजना के अंतर्गत मिले रोजगार से आमदनी बढ़ी है और कच्ची झोपड़ियां पक्के मकान में तब्दील हो रही है । सूक्ष्म व्यवसाय अब बड़े व्यवसाय में तब्दील हो रहे हैं l सतत जीविकोपार्जन योजना से लाभान्वित हुए कई परिवार अब एक से अधिक व्यवसाय कर रहे हैं और उतरोत्तर वृद्धि की ओर है l गाय पालन के साथ ही दुग्ध व्यवसाय भी मुनाफा दे रहा है l ताड़ी एवं देशी शराब उत्पादन से जुड़े परिवार अब अपने पुश्तैनी एवं पारंपरिक व्यवसाय से इतर रोजगार करते हुए समाज में मान-सम्मान भी पा रहे हैं l
लखीसराय जिला में सतत जीविकोपार्जन योजना के तहत कुल चयनित परिवारों की संख्या 2 हजार 141 है l इसमें 3 सौ 30 परिवार देशी शराब के उत्पादन एवं बिक्री से जुड़े हुए थे l ताड़ी उत्पादन एवं बिक्री में पारंपरिक रूप से 2 सौ 91 परिवार जुड़े थे l कुल 1 हजार 6 सौ 24 परिवारों को उनके रूचि के अनुरूप व्यवसाय के लिए जीविकोपार्जन अंतराल राशि उपलब्ध कराई गयी है l ये परिवार अब परिसंपत्ति सृजन में लग गए हैं l इनमे से 947 परिवारों ने सूक्ष्म उद्यम भी शुरू किया है l जीविका से मिले सहयोग, मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण से शुरू किये गए स्वरोजगार ने उनकी आर्थिक एवं सामाजिक स्र्थिति उन्नत की है l साथ ही इन परिवारों को सतत जीविकोपार्जन योजना के साथ ही राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा संचालित योजनाओं का भी लाभ मिलने लगा है l मसलन 1 हजार 5 सौ इकतालीस परिवारों का राशन कार्ड भी बन गया है l इनके घरों में शौचालय , बी.पी.एल कार्ड, आयुष्मान कार्ड आदि भी बन गया है l

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