
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)15 जुलाई।श्रावण समारधना के क्रम में श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् एवं सनातन-सुरसरि सेवा न्यास द्वारा श्रीसहदेव गिरि मंदिर कतिरा में आयोजित सप्तदिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन प्रवचन करते हुए आचार्य डॉ भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि इष्टदेव में दृढ़ निष्ठा और शास्त्रोक्त विधि-निषेधों का पालन साधक को समस्त सिद्धियां प्रदान कर देता है। शतरुद्रसंहिता की कथा कहते हुए आचार्य ने भगवान शिव के गृहपति अग्न्यावतार, द्विजेश्वरावतार, सुरेश्वरावतार, पिप्पलाद ऋषि का अवतार आदि कथाओं का विशद वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जीवन में जितनी तपस्या होती है वही हमारे और हमारे सगे संबंधियों के लिए पूंजी है।कायिक-वाचिक-मानसिक तप और सभी प्राणियों के हित में निरत रहना शिवभक्त का सबसे बड़ा लक्षण है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव करुणा के सागर हैं। यदि हमारी निष्ठा और अनन्यता उनके श्रीचरणों में है तो समस्त अभिलषित भोग और मोक्ष वे साक्षात् दर्शन देकर प्रदान करते हैं। आचार्य ने उपमन्यु आदि भक्तों की कथा सुनाते हुए कहा कि उसने शिव से ही वरदान प्राप्त करने का संकल्प लिया था। भगवान शिव ही देवराज इन्द्र के रूप में प्रकट हुए किंतु उपमन्यु ने उनसे कुछ भी लेने से साफ मना कर दिया। भक्ति में हमारी इसी प्रकार की दृढ़ता और अनन्यता होनी चाहिए। आचार्य ने राजा सत्यरथ की कथा सुनाते हुए कहा कि पूजा बीच में छोड़कर अन्यत्र जाना और दूसरे कार्यों में ध्यान बंटाना अत्यंत दोषजनक हो जाता है। इस अवसर पर प्रातःकाल वैदिक पंचदेव पूजन, शिवार्चन तथा रुद्राभिषेक संपन्न हुआ। स्वागत पुजारी अजय कुमार मिश्र तथा धन्यवाद ज्ञापन मधेश्वर नाथ पाण्डेय ने किया।
