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भोजपुर:बरतियर गांव में जल जीवन हरियाली योजना में भ्रष्टाचार, ग्रामीणों ने लगाया संवेदक पर आरोप।

आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)11 जून।बिहार सरकार की अति महत्वाकांक्षी जल जीवन हरियाली योजना में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार का ताजा मामला संदेश प्रखंड के बरतियर गांव का आया है।यहां एक करोड़ 74 लाख रुपये की लागत से पुराने पोखरे का जीर्णोद्धार होना है। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित ठेकेदार बस खानापूर्ति कर लाखों रुपये हजम करने की फिराक में है। ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग और जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर अपनी आपत्ति जताई है। लघु सिंचाई प्रमंडल आरा द्वारा बरतियर गांव के पोखरे एवं आहर की खुदाई और आउटलेट के निर्माण का टेंडर किसी हेमावती देवी को सौंपा गया है। कार्यस्थल पर लगे साईन बोर्ड में कार्य प्रारंभ की तिथि 08 जनवरी, 2025 लिखा है जबकि कार्य पूर्ण होने की तारीख 08-10-2025 अंकित है। बिहार में बरसात का मौसम जून मध्य से शुरू होकर अक्टूबर मध्य का माना जाता है। ऐसे में कुल योजना अवधि 10 महीने के चार महीने बारिश वाले रहने वाले हैं। बरतियर गांव के ग्रामीणों ने योजना कार्यान्वयन में हो रही गड़बड़ी और संभावित भ्रष्टाचार को लेकर दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपा है। लघु जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता, आरा अंचल को दिये ज्ञापन में जहां संवेदक द्वारा की जा रही गड़बड़ियों की चर्चा है। वहीं, जिलाधिकारी, भोजपुर को शिष्टमंडल के जरिये सौंपे गये आवेदन में पोखरे को सबसे पहले अतिक्रमण से मुक्त करने की गुहार लगाई गयी है। भारतीय मानवाधिकार संगठन के जिला सदस्य और ग्रामीण प्रिंस कुमार ने जल संसाधन विभाग को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि संवेदक के द्वारा जान-बूझकर चार महीने देरी से यानि 18 अप्रैल, 2025 से पोखरा उड़ाही का कार्य शुरू किया गया, ताकि बरसात का मौसम आ जाए और उसकी गलतियों पर लीपापोती हो जाए। भोजपुर जिलाधिकारी को सौंपे गये ज्ञापन में बरतियर के ग्रामीणों जयनंदन राय, प्रशांत कुमार, अजीत कुमार, प्रिंस राय, नितीन राय, विनोद राय आदि ने सबसे पहले पोखरे के चारो तरफ हुए अतिक्रमण को हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि पहले 52 बीघे में फैला बरतियर का पोखरा करीब 22 सौ बीधे के रकबा वाले गांव की सिंचाई जरुरत को अकेले पूरा करता था। इस पोखरे में विशाल सूर्यमंदिर है, आसापास के गांवों से हर साल हजारों लोग छठ व्रत करने आते हैं। लेकिन वर्षों तक मरम्मति के अभाव और अतिक्रमण की चपेट में आने से यह ऐतिहासिक पोखरा अस्तित्व खोने के कगार पर पहुंच गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जीर्णोद्धार कार्य को देखने से ऐसा लगता है कि विभागीय अभियंता और ठेकेदार मिलकर पैसे का बंदरबांट करना चाहते हैं और सरकार की ‘हर खेत पानी’ पहुंचाने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना को चूना लगाने की फिराक में हैं। इस मामले में त्वरित कार्रवाई किये जाने की जरुरत है। वरना गांव के किसान पोखरा खुदाई के कार्य को रोकने पर मजबूर हो जाएंगे।

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