पुरातत्व एवं आदिवासी कलाओं को संरक्षित करने हेतु संग्रहालय की सराहना की।
खैरागढ़/छत्तीसगढ़ (रवींद्र पांडेय) 03 जून। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ की कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय का अवलोकन किया। सर्वप्रथम उन्होंने छत्तीसगढ़ प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर मौजूद प्राचीन मंदिरों का अवलोकन किया। इसके निर्माण सहित अन्य विषयों पर जानकारी प्राप्त की। इसके बाद प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से संरक्षित की गईं प्राचीन प्रतिमाओं से अवगत हुईं। इनकी विशेषताओं को जाना। साथ ही सिरपुर उत्खनन में प्राप्त लोहे की वस्तुओं, पूजा उपासना की सामग्री, पाषाण युगीन शस्त्र, ताम्र युग की संस्कृति एवं कांस्य संस्कृति सहित अनेक वस्तुओं से अवगत हुईं। इसके बाद विभिन्न लिपियों में लिखे गए शिलालेख एवं काष्ठ स्तंभ लेख से भी परिचित हुईं। इसे प्राचीन भारतीय इतिहास और संस्कृति का महत्वपूर्ण स्रोत बताया।
इसके बाद कुलपति डॉ. शर्मा प्राकृतिक वन्य जीवों के संरक्षण के लिए बनायी गयी प्रदर्शनी एवं प्राचीन अस्त्र–शस्त्र से भी अवगत हुईं। साथ ही आदिवासी कलाओं को संरक्षित करने हेतु बनायी गयी आदिवासी कला दीर्घा का भी अवलोकन किया। आदिवासी वाद्य यंत्रों व कलाओं सहित विभिन्न विषयों का भी अवलोकन किया। संग्रहालय के अवलोकन के दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति एवं पुरातत्व विथिकाओं को संरक्षित करने का यह कदम बेहद ही सराहनीय है।
इस संग्रहालय के माध्यम से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पुरातत्वों के संरक्षण के लिए उठाये गये कदम से वर्तमान तथा आने वाली पीढ़ियों को हमारी कला एवं संस्कृति को बारीकी से जानने व समझने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय स्थित संग्रहालय में भी अधिक से अधिक पुरातत्व विथिकाओं का संरक्षण किए जाने हेतु विशेष पहल करने की बात कही, जिससे क्षेत्रीय लोगों को भी भारतीय संस्कृति, पुरातत्वों एवं कलाओं को जानने तथा समझने का अवसर मिल सके।

