
RKTV NEWS/रांची (झारखंड)03 मई। गुरुवार को राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय रांची में संप्रेषण कला पर पर दो सत्रों में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे रांची विश्वविद्यालय रांची के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डा जंग बहादुर पाण्डेय ने कहा कि अनुभूति की सम्यक अभिव्यक्ति संप्रेषण कला है।यह आदर्श शिक्षक की एक महत्वपूर्ण कसौटी है।अपनी बात को बेहतर से बेहतरीन ढंग से श्रोताओं के पास पहुंचाना संप्रेषण कला का वैशिष्ट्य है। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान के पूर्व मुख्य तकनीकी पदाधिकारी डॉ अंजेश कुमार ने अपने व्याख्यान में संप्रेषण कौशल की तकनीकी जानकारियों को बतलाया और कहा कि संप्रेषण अपने को व्यक्त करने एवं दूसरे को समझने की कला है। यह उस समय प्रभावशाली होता है, जब आप जिस बात को अभिव्यक्त करना चाहते हैं ,वह ठीक उसी ढंग से दूसरे तक पहुंच सके। जब कोई व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को स्पष्ट और सटीक रूप से व्यक्त करता है तथा दूसरे को समझाने में सफल होता है- प्रभावी संप्रेषण कहलाता है । विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर धनबाद के संस्थापक प्राचार्य डॉ वासुदेव प्रसाद ने कहा कि संप्रेषण आदर्श शिक्षक की एक महत्वपूर्ण कसौटी है। विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए कैम्ब्रियन पब्लिक स्कूल कांके की विदुषी प्राचार्या प्रेम लता ने कहा कि संप्रेषण के लिए श्रवण आवश्यक है। बोलने से श्रवण अधिक महत्वपूर्ण है।श्रवण की क्रिया मां के गर्भ से शुरू हो जाती है, जबकि अभिव्यक्ति जन्म के लगभग दो वर्षों के बाद शुरू होती है। महाभारत के अर्जुन पुत्र अभिमन्यु ने अपनी मां सुभद्रा के गर्भ में ही चक्रव्यूह भेदन की कला श्रवण से सीख लिया था।शिक्षाविद् गोविंद पाठक एवं शिवपूजन पाठक ने भी सार्थक उद्गार व्यक्त कर संगोष्ठी में चार चांद लगाये। गोविंद पाठक ने सभी प्रशिक्षुओं को आशीर्वचन दिया और राजकीय शिक्षक महाविद्यालय रांची की भूरिश:प्रशंसा की। संगोष्ठी में सत्र 2024 -26 के सभी प्रशिक्षु शिक्षक सहित महाविद्यालय के शिक्षक प्रो भागीरथ आर्य,प्रो दुलाल चन्द्र महतो उपस्थित रहे।
आगत अतिथियों का भव्य स्वागत (पुष्प गुच्छ, प्रतीक चिन्ह और शाल देकर ) विद्वान शिक्षक डा ओम प्रकाश ने, समवेत सरस्वती वंदना प्रशिशु शिक्षकों ने, संचालन प्रशिक्षु शिक्षक चंद्रशेखर ने और धन्यवाद ज्ञापन छात्र संसद के प्रधानमंत्री प्रशिक्षु शिक्षक चमन कुमार मिस्री ने किया। समापन शांति पाठ एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ।
