
RKTV NEWS/दरभंगा(बिहार )03मई।महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए,दरभंगा जिले के सभी प्रखंडों में महिला दिवस कार्यक्रम की श्रृंखला के 15वें दिन शुक्रवार को व्यापक स्तर पर विशेष आयोजन किए गए।
आयोजनों में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी रही,वहीं कई स्थानों पर पुरुषों की भी सक्रिय उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक समावेशी स्वरूप प्रदान किया।
सरकारी योजनाओं की जानकारी से लैस चलंत स्क्रीनयुक्त वाहन कार्यक्रम स्थलों पर आकर्षण का केंद्र बने। इन स्क्रीन पर जैसे ही योजनाओं से जुड़ी जानकारी प्रसारित हुई,वहां मौजूद भीड़ में उत्सुकता और जागरूकता देखने को मिली।
मुख्यमंत्री द्वारा भेजे गए संदेश पत्र के पठन ने महिलाओं के आत्मविश्वास को बल दिया और उन्हें यह भरोसा मिला कि सरकार उनकी आवाज़ को गंभीरता से सुन रही है।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि रोजगार और स्वरोजगार की सीमित उपलब्धता तथा पलायन की विवशता उनकी प्रमुख चिंताएं हैं।
महिलाओं ने स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन की आवश्यकता को रेखांकित किया और सरकार से ऐसी योजनाओं की मांग की जो उन्हें स्थायी और नियमित मासिक आमदनी का अवसर दें। साथ ही,बालिकाओं की शिक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की भी अपील की गई।
गौड़ाबौराम प्रखंड के आस्था ग्राम संगठन क्षेत्र की दसवीं कक्षा की छात्रा सरस्वती कुमारी ने महिला संवाद कार्यक्रम के दौरान सरकार की कन्या उत्थान योजना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना से लड़कियों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का नया अवसर मिला है।
उन्होंने अपने विद्यालय में बेंच-डेस्क,शौचालय और चापाकल जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी की ओर ध्यान दिलाया और सरकार से इन सुविधाओं की व्यवस्था की मांग की।
इसके साथ ही सरस्वती ने गाँव में मौजूद अन्य समस्याओं को भी बेझिझक उठाया। उन्होंने छात्राओं के लिए स्कूटी और लैपटॉप जैसी सुविधाओं की मांग करते हुए यह सुझाव दिया कि इससे शिक्षा में भागीदारी और सुगमता दोनों बढ़ेगी।
सरस्वती ने गाँव के युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर बल दिया और सरकार से स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने की अपील की।
मनीगाछी प्रखंड की ललिया देवी ने अपने वक्तव्य में कहा, “हम अपने परिवार के सदस्यों को रोज़गार के लिए बाहर नहीं भेजना चाहते। अगर स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल जाए,तो यहीं रहकर काम करना बेहतर होगा।”
ग्राम संगठनों द्वारा क्षेत्र की बंद पड़ी चीनी मिल को पुनः चालू करने की मांग कर रही है। साथ ही,स्थानीय स्तर पर नए उद्योगों की स्थापना की आवश्यकता जताई गई ताकि लोगों को घर के पास ही आजीविका मिल सके।
खेती और पशुपालन से जुड़ी महिलाओं ने तकनीकी प्रशिक्षण,सुलभ ऋण सीमा और ब्याज दरों में कटौती जैसी सुविधाओं की मांग की जिससे वे अपने व्यवसायों को बेहतर ढंग से संचालित कर सकें।
कार्यक्रमों के माध्यम से यह साफ संदेश गया कि आज की महिलाएं सिर्फ पारंपरिक घरेलू भूमिकाओं तक सीमित नहीं रहना चाहतीं,बल्कि वे आर्थिक विकास की मुख्यधारा में भागीदार बनना चाहती हैं। वे समाज के हर क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभाने को तत्पर हैं।
केवटी प्रखंड की चाँदनी देवी ने कहा, “हम अब खुद को सुरक्षित महसूस कर रही हैं और शिक्षा,कौशल और रोजगार की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। सरकार की योजनाओं से हमें आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिली है।”
महिला संवाद कार्यक्रम महिलाओं को मंच प्रदान कर रहा है जहाँ वे अपनी आकांक्षाएँ साझा कर सकती हैं और उन्हें प्रशासनिक स्तर तक पहुंचाने में समर्थ बन रही हैं।
यह पहल न केवल महिलाओं में जागरूकता और आत्मविश्वास जगा रही है,बल्कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा भी बना रही है।
