
RKTV NEWS/पटना (बिहार)30 मार्च।सांस्कृतिक संस्था ‘इमैजिनेशन’ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव ‘बिहार रंग महोत्सव: बिहारंगम-2025’ बिहार पुलिस को समर्पित रहा और रंगमंच व लोकसंस्कृति की शानदार प्रस्तुतियों के साथ आज संपन्न हुआ। हर साल इस महोत्सव में कला से जुड़े लोगों को ‘बिहार रत्न सम्मान’ से सम्मानित किया जाता रहा है और इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष यह सम्मान नाट्य निर्देशन के क्षेत्र में दिया गया है।
बिहार रत्न सम्मान (सीनियर): वरिष्ठ रंगकर्मी विनोद राय (NSD पासआउट)बिहार रत्न सम्मान (जूनियर): युवा नाट्य निर्देशक अभिषेक राज (ड्रामेबाज़)
नाट्य महोत्सव में पहले दिन विनय कुमार (डी.जी.पी., बिहार), ए.के. अम्बेडकर (डी. जी., बी. एस. ए. पी.) मौजूद रहे। दूसरे दिन त्रिपुरारी शरण (मुख्य सूचना आयुक्त), अजीत राय (वरिष्ठ फिल्म समीक्षक), विनोद अनुपम ( संरक्षक एवं अभिभावक, इमैजिनेशन) उपस्थित रहे। वहीं इस महोत्सव के तीसरे और अंतिम दिन आलोक राज (डीजी, बिहार पुलिस)
प्रिया प्रकाश, (ए.जी.एम. बैंकिंग डिपार्टमेंट, आर.बी.आई.)
वीणा कुमारी ( DGM , planning & cordination ) iocl state office.अभय नारायण सिंह ( संरक्षक एवं अभिभावक, इमैजिनेशन)परवेज़ अख़्तर (वरिष्ठ रंगकर्मी)राजेश शर्मा (डी.एस.पी. बी.एम.पी.- 5)ज्योति परिहार (डायरेक्टर किलकारी बिहार बल भवन) मौजूद रहें।
पहली प्रस्तुति में आरबीआई और आईओसीएल के लिए जागरूकता फैलाने हेतु नुक्कड़ नाटक किया गया।
दुसरी प्रस्तुति पटना के “आमद” समूह द्वारा प्रस्तुत “सामा-चकवा” लोक नृत्य ने बिहार की ग्रामीण संस्कृति को मंच पर जीवंत किया। यह प्रस्तुति नारी प्रेम, समर्पण और लोक परंपरा को दर्शाने वाली रही, जिसमें गीत, संगीत और नृत्य का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।
तीसरी प्रस्तुति ‘कुमार उदय सिंह’ द्वारा निर्देशित “लौंडा नाच” ने बिहार की पारंपरिक नृत्य शैली को जीवंत कर दिया। यह नृत्य रूप बिहार की रंगमंचीय विरासत का एक अहम हिस्सा है, जिसे मंच पर देखना एक अनूठा अनुभव रहा।
चौथी प्रस्तुति नाटक “मानो ना” की प्रस्तुति हुई, जिसे अभिषेक राज ने लिखा और निर्देशित किया। “किलकारी बिहार बाल भवन” द्वारा प्रस्तुत यह नाटक सामाजिक संवेदनाओं और मानवीय रिश्तों की गहराइयों को छू गया।
तीन दिनों तक चले इस भव्य रंग महोत्सव में भाग लेने वाले सभी कलाकारों ने समाज, कला, संस्कृति और परंपरा को अपनी-अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। बिहारंगम 2025 ने रंगमंच प्रेमियों को उत्कृष्ट नाट्य अनुभव प्रदान किया और बिहार की रंगमंचीय पहचान को और सशक्त बनाया।
