
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)23 मार्च।राष्ट्रीय महिला शिक्षक मोर्चा ( NFWT ) बिहार की महासचिव कुमारी अल्का ने कहा कि इलाहाबाद के न्यायाधीश का फैसला दुष्कर्मी पवन और आकाश के बचाव पक्ष में तथा पॉक्सो एक्ट के खिलाफ है। इस तरह के न्याय निर्णय से अपराधियों, दुष्कर्मियों एवं बलात्कारियों का मनोबल ऊंचा होगा। घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि होगी। उक्त फैसला से देश की नारियां अपमानित और मर्माहत हुई है।
उतर प्रदेश के कासगंज निवासी 11 वर्षीय किशोरी के केश के फैसले में न्यायमूर्ति इलाहाबाद राममनोहर मिश्र ने कहा कि किसी लड़की / महिला के निजी अंग को छूना या पकड़ना, उसके पैजामे के नारे को खोलना दुष्कर्म या बलात्कार नहीं है, जो खेदजनक और घोर निंदनीय है।
19.11.2021 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी भी बच्चे के यौन अंगों को छूना , यौन इरादे से शारीरिक संबंध से जुड़ा कोई भी कृत्य पॉक्सो एक्ट की धारा – 07 ( सात ) के तहत यौन हमला माना जाएगा। इसमें सबसे महत्वपूर्ण इरादा है न कि त्वचा से त्वचा का संपर्क। जबकि भारतीय दंड संहिता की धारा – 294 और 509 के तहत किसी भी युवती या महिला को चौदह सेकेंड तक घूरना या देखना अपराध माना जाता है अथवा अपराध की श्रेणी में आता है। कुमारी अल्का ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से न्यायमूर्ति इलाहाबाद के महिला विरोधी फैसले पर संज्ञान लेने की मांग की।
