
आरा/भोजपुर( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)12 मार्च।टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज के द्वारा राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर हिंदी की दशा एवं दिशा विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए विश्व हिंदी परिषद दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा विपिन कुमार ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है और संविधानिक रूप में इसे राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। हिंदी अब केवल राष्ट्रीय क्षितिज पर ही नहीं, अपितु विश्व पटल पर अपना परचम फहरा रही है। विश्व के अनेक देश हिंदी को अपनाने के लिए लालायित हैं। हिंदी विश्व की तीसरी बड़ी भाषा है।वह दिन दूर नहीं जब यह संयुक्त राष्ट्र संघ की अधिकारिक भाषा बनेगी।हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए अब तक 12 विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हो चुके हैं।वाई बी एन विश्वविद्यालय रांची के अध्यक्ष डा राम जी यादव ने कहा कि हमें अपनी हिंदी पर नाज और ताज है।वाई बी एन विश्वविद्यालय रांची हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए अपने स्थापना काल से ही सक्रिय रहा है। विश्व हिंदी परिषद दिल्ली के उपाध्यक्ष डा दीपक ठाकुर ने कहा कि विश्व हिंदी परिषद दिल्ली हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए कृत संकल्पित है। विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए डा वासुदेव प्रसाद ने कहा कि हिंदी में काम करना गौरव की बात है।डा अंजनी सिंह चौहान ने कहा कि हिंदी सरल और सहज भाषा है।इसे अपना चाहिए। संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे रांची विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ जंग बहादुर पाण्डेय ने कहा कि भाषा केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, अपितु यह हमारी अस्मिता का बोधक है। हिंदी भारत मां की बिंदी है। बिछुआ लाख टके का हो फिर भी पैरों में पहना जाता है,बिंदी चाहे एक रूपये की हो, लेकिन माथे पर लगाई जाती है।उन्होंने कहा कि हमारी हिंदी नायाब, लाजबाव और कामयाब है, क्योंकि छू लो तो चरण,अड़ा दो तो टांग,धंस जाए तो पैर,फिसल जाए तो पांव,आगे बढ़ाना हो तो कदम,राह में चिह्न छोड़े तो पद, प्रभु के हों तो पाद।बाप की हो तो रात,गधे की हो तो दुलत्ती, घुंघुरू बांध लो तो पग,खाने के लिए टंगड़ी और खेलने के लिए लंगड़ी। अंग्रेजी में पैर के लिए सिर्फ LEG है। इसीलिए तो हम कहते हैं कि
कोटि-कोटि कंठों की भाषा,जन मन की मुखरित अभिलाषा,हिंदी है पहचान हमारी,*हिंदी हम सबकी परिभाषा।संगोष्ठी का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ किया। आगत अतिथियों का भव्य स्वागत डा कैलाश नाथ सिंह ने,विषय प्रवेश डा ओम प्रकाश ने,संचालन प्रशिक्षु शिक्षिका ऋधिमा द्विवेदी ने और धन्यवाद ज्ञापन जुवेल ने किया।
स्वागत गान मनीषा, अमित, फुलमनी, सपना,संता, डॉसी, प्रिशिला, एरिका, रौशनी ने किया।
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ संजय कुमार ठाकुर, शिक्षिका डॉ मांडवी राय , डॉ प्रियंका कुमारी, डॉ सलमा, डॉ सुभाष, डॉ कैलाश नाथ सिंह, डॉ अंजनी सिंह, उमेश सिंह,रवि रंजन सिंह,कामेश साहु ने हिंदी के पक्ष में अपने उद्गार व्यक्त किए और कहा कि हमारे देश की अधिकांश जनता हिंदी बोलती,लिखती और समझती है, जो बतलाता है कि हिंदी भाषा अपनी एक मजबूत पहचान रखती है।राष्ट्रगान के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।
