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दरभंगा एम्स पर PM मोदी को सुमित मिश्र का पत्र, निर्माण में तेजी और अस्थायी OPD शुरू करने की मांग।

सुमित कुमार मिश्र
2015 में हुई थी घोषणा, स्थायी भवन बनने तक वैकल्पिक परिसर में विशेषज्ञ परामर्श और जाँच सुविधाएँ उपलब्ध कराने का आग्रह

मधुबनी/बिहार (मनोज कुमार प्रसाद)26 अक्टूबर। मिथिलांचल के लाखों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए दरभंगा एम्स के निर्माण में तेजी लाने और स्थायी भवन तैयार होने तक अस्थायी ओपीडी एवं जाँच सुविधाएँ शुरू करने की मांग उठाई गई है। दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता, पत्रकार एवं ‘नवभारत का न्याय दर्शन’ के लेखक सुमित कुमार मिश्र ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर केंद्र और बिहार सरकार से समन्वित पहल करने का आग्रह किया है।

मिश्र ने अपने पत्र में कहा है कि दरभंगा एम्स केवल एक अस्पताल परियोजना नहीं, बल्कि मिथिलांचल और आसपास के क्षेत्रों के लाखों लोगों की बेहतर एवं सुलभ इलाज की उम्मीद है। गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए मरीजों को दूरस्थ शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है और समय पर उपचार प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

निर्माण के लिए तय हो समय-सीमा

पत्र में उल्लेख किया गया है कि दरभंगा एम्स की घोषणा 28 फरवरी 2015 को हुई थी। इसके बाद देवघर एम्स की घोषणा 2017 में हुई और वहाँ मरीजों का उपचार शुरू हो चुका है। ऐसे में दरभंगा एम्स के निर्माण और संचालन को लेकर लोगों की अपेक्षाएँ स्वाभाविक रूप से बढ़ी हुई हैं।

सुमित कुमार मिश्र ने प्रधानमंत्री से दरभंगा एम्स की उच्चस्तरीय समीक्षा कराने, निर्माण कार्य के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने तथा उसकी समय-सीमा तय करने का आग्रह किया है। उन्होंने आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने, संबंधित विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने और नियमित निगरानी के माध्यम से निर्माण कार्य को गति देने की मांग की है।

स्थायी भवन का इंतजार, लेकिन इलाज नहीं रुके

पत्र का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि एम्स का स्थायी भवन बनने तक मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रतीक्षा न करनी पड़े। मिश्र ने सुझाव दिया है कि किसी उपयुक्त सरकारी अस्पताल अथवा अन्य सरकारी परिसर में उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अस्थायी ओपीडी शुरू की जाए। इसके साथ विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श और आवश्यक जाँच सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जाएँ।

उन्होंने कहा कि मरीजों की बीमारी निर्माण कार्य पूरा होने की प्रतीक्षा नहीं करती। यदि अंतरिम स्वास्थ्य सेवाएँ शुरू कर दी जाएँ, तो गंभीर और जरूरतमंद मरीजों को तत्काल राहत मिल सकती है। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए चिकित्सकों की उपलब्धता, आवश्यक उपकरण, जाँच सुविधाएँ और प्रशासनिक समन्वय सुनिश्चित करने की जरूरत है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और बिहार सरकार से भी आग्रह

सुमित कुमार मिश्र ने प्रधानमंत्री से इस मामले को जनस्वास्थ्य की प्राथमिकता मानते हुए संबंधित मंत्रालय और बिहार सरकार को आवश्यक निर्देश देने का अनुरोध किया है।

पत्र की प्रतिलिपि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जे. पी. नड्डा, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, राज्यसभा सांसद एवं जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव तथा बिहार के मुख्य सचिव को भी भेजी गई है।

मिश्र ने उम्मीद जताई है कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से दरभंगा एम्स के निर्माण को गति मिलेगी और स्थायी परिसर तैयार होने तक वैकल्पिक स्वास्थ्य सेवाएँ शुरू करने की दिशा में ठोस कार्रवाई होगी।

उनकी मांग का मूल संदेश स्पष्ट है—दरभंगा एम्स का निर्माण समयबद्ध तरीके से पूरा हो और जब तक स्थायी अस्पताल तैयार नहीं होता, तब तक मरीजों को इलाज एवं जाँच की सुविधाओं से वंचित न रहना पड़े।

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