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पटना:गुणवत्तापूर्ण और मूल्यवान जीवन के अप्रतिम आदर्श थे ‘जगतबंधु’ : डॉ सुलभ

जयंती पर साहित्य सम्मेलन में डा पूनम आनन्द का हुआ एकल कथा-पाठ, आयोजित हुई कथा-गोष्ठी।

RKTV NEWS/पटना(बिहार)22 जुलाई। कोई व्यक्ति अपने जीवन को किस प्रकार मूल्यवान और गुणवत्तापूर्ण बना सकता है, यह स्तुत्य साहित्यकार जगत नारायण ‘जगतबंधु’ के जीवन से सीखा जा सकता है। वे जीवनादर्श के अनुपम उदाहरण और प्रेरणा-पुरुष थे। उनका अनुशासित और कल्याणकारी जीवन स्वयं में ही एक ऐसा ग्रंथ रहा, जिसका अध्ययन कर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को मूल्यवान और सार्थक बना सकता है। 93वें वर्ष की आयु में अपना देह छोड़ने के पूर्व तक वे 70 वर्ष के किसी व्यक्ति से अधिक स्वस्थ, सक्रिय और ज़िंदादिल दिखते थे।

यह बातें बुधवार को बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन में आयोजित जयंती-समारोह एवं सम्मेलन द्वारा जारी ‘कथयामि कथा’ ऋंखला के अंतर्गत एकल-कथा-पाठ और कथा-गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए, सम्मेलन-अध्यक्ष डा अनिल सुलभ ने कही। उन्होंने कहा कि जीवन से सात्विक-प्रेम रखने वाले और सबके लिए कल्याण की सदकामना रखने वाले कर्म-योगी जगतबंधु जी की हिन्दी सेवा भी श्लाघ्य और अनुकरणीय है। बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के रूप में अपनी निष्ठापूर्ण सेवाओं से अवकाश लेने के पश्चात जगतबंधु जी साहित्य की ओर अभिमुख हुए और हिन्दी साहित्य की भी उसी निष्ठा से सेवा की। ‘गीतांजलि’ के नाम से ‘गीता’ पर हिन्दी में लिखी इनकी पुस्तक, उनके विशद आध्यात्मिक ज्ञान, चिंतन और लेखन-सामर्थ्य का ही परिचय नहीं देती, पाठकों को गीता के सार को समझने की भूमि भी प्रदान करती है।

इस अवसर पर आयोजित एकल कथापाठ ऋंखला ‘कथयामि-कथा’ के अंतर्गत आज डा पूनम आनन्द ने अपना एकल कथा-पाठ किया। उनके द्वारा पढ़ी गयी कथाओं ‘अकल्पित परिणाम’ तथा ‘उम्र अंठावन का डर’ पर चर्चित कथाकार चित्तरंजन लाल भारती, डा रत्नेश्वर सिंह तथा गार्गी राय ने अपनी त्वरित समीक्षा की। इसके पूर्व सम्मेलन के पुस्तकालयमंत्री ईं अशोक कुमार ने लेखिका का जीवन-परिचय पढ़ा।

कथा-गोष्ठी में, डा ऋचा वर्मा ने ‘गहराई’, सरिता कुमारी ने ‘लाचारी’, ईं अशोक कुमार ने ‘बुढ़ापे का सहारा’, बिन्देश्वर प्रसाद गुप्ता ने ‘सबसे बड़ा दुःख’, नन्दन कुमार ने ‘चीनी’ तथा इन्दुभूषण सहाय ने ‘स्वदेशी’ शीर्षक से लघुकथा का पाठ किया। अतिथियों का स्वागत सम्मेलन की प्रचारमंत्री विभारानी श्रीवास्तव ने तथा धन्यवाद-ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया। चंदा मिश्र की वाणी-वंदना से आरम्भ हुए इस कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने किया।

प्रो सुनील कुमार उपाध्याय, आराधना प्रसाद, डा शालिनी पाण्डेय, प्रवीर कुमार पंकज, सूर्य प्रकाश उपाध्याय, सुजाता मिश्र, डा रेखा भारती मिश्र, अश्विनी कविराज, डा राजेश्वर सिंह, सच्चिदानन्द शर्मा, डा चंद्रशेखर आज़ाद, रंजन कुमार अमृतनिधि, श्याम मनोहर मिश्र, ओम् प्रकाश, प्रदीप पाण्डेय, रोज़ी परवीन, शम्भु कुमार आदि बड़ी संख्या में सुधीजन उपस्थित थे।

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