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तारा है सारा जमाना श्याम हमको भी तारो : जीयर स्वामी जी महाराज

श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ स्थल पर उमड़ी भक्तों की भारी भीड़।

दिनारा/रोहतास(डॉ अजय ओझा,वरिष्ठ पत्रकार)1 जून। मउडिहरा में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़ को संबोधित करते हुए परम पूज्य श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज ने कहा कि आज से लगभग छह हजार वर्ष पहले भगवान श्रीकृष्ण इस धरा पर लीला करने के लिए आये थे। उसी समय अन्याय पर न्याय की जीत के लिए महाभारत युद्ध हुआ था। लेकिन कुछ लोग भगवान कृष्ण, भगवान राम तथा रामायण और महाभारत आदि ग्रंथों को काल्पनिक बताते हैं। इतना ही नहीं ऐसे चंद आलोचक इन ग्रंथों में वर्णित तथ्यों की आलोचना भी करते हैं। यह दोहरा चरित्र और रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे द्वेषी लोगों की आलोचना से सनातन धर्म कमजोर नहीं वरन और मजबूत होगा। स्वामी जी ने भक्तों को उपदेश देते हुए कहा कि यह संसार घर नहीं प्रतीक्षालय है। यह दुनिया एक चलती हुई गाड़ी है और हम सभी यात्री हैं। दरअसल यह संसार एक माया है। लेकिन कुछ लोग कहते हैं कि यह संसार एक झंझट है। वास्तव में यह संसार झंझट नहीं है, इसे हमने झंझट बना दिया है। इस संसार को अपना समझ लेना सबसे बड़ा झंझट है।
नौका को जल में रहना चाहिए लेकिन नौका में जल नहीं रहना चाहिए अन्यथा नौका डूब जायेगी।

उन्होंने कहा कि कोई भी सुंदर चीज जो आपको प्राप्त हो सबसे पहले भगवान को समर्पित कर फिर अपने उपयोग में लाना चाहिए। इस सृष्टि की रचना ईश्वर ने किया है। इस संसार में उपलब्ध भोग-प्रसाद की सारी वस्तुओं का निर्माण ईश्वर ने किया है। लेकिन कुछ लोग लोभ लालच में धन संग्रह को ही अपना ध्येय बना लेते हैं। लेकिन नैतिकता के अभाव में यह जीवन एक बोझ के समान है।

स्वामी जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को समझाते हुए कहा कि नारियों को कमतर नहीं समझना चाहिए। नारियों का इस संसार में सभ्यता के उत्कर्ष में बहुत बड़ा योगदान है।
अति विदुषी विद्योतमा का विवाह विद्वानों ने द्वेष के कारण निपट मूर्ख कालीदास से करा दिया। लेकिन मां काली की कृपा से वे सबसे बड़ा विद्वान और कवि बन गए। स्वामी जी ने कहा कि सृष्टि के प्रारंभ में चारों तरफ जल ही जल था। नीर में निवास करने वाले ही नारायण हैं। जब जब सृष्टि पर संकट आता है, तब तब संसार की रक्षा के लिए नारायण अवतार ग्रहण करते हैं। उन्होंने वर्तमान में सामाजिक व्यवस्था पर अफसोस प्रकट करते हुए कहा कि घोर कलयुग चल रहा है। इस कलयुग में शर्म नहीं रह गया है। भावज और जेठ एक ही टेबल पर जलपान कर रहे हैं। यह बहुत ही दु:खद है।

उन्होंने कहा कि यह संसार एक सराय है। इसे अपना समझ लेना सबसे बड़ा आश्चर्य है। घर, संपत्ति, स्त्री, पुत्र, पुत्री सब यहीं रह जाना है। लेकिन फिर भी मनुष्य मोह ग्रस्त होकर धन संपत्ति के लिए तरह तरह का कुकर्म करता है। घर घर में संपत्ति का विवाद चल रहा है। लेकिन कुछ भी साथ नहीं जाता
एकमात्र धर्म हमारे साथ जाता है। अच्छे कर्मों की चर्चा व्यक्ति के मृत्यु के उपरांत भी होती है। उन्होंने कहा कि पंचतत्वों के बारे में जानकारी होना ही ज्ञान है। पूजा, पाठ, दान, धर्म तथा तीर्थ यात्रा का फल अगले जन्म में प्राप्त होता है। हम सभी प्राणी ईश्वर के ही अंश हैं – ईश्वर अंश जीव अविनाशी।
यह संसार मर्यादा पर टिका हुआ है। निर्मल मन जन सो मोहि पावा। उन्होंने लोगों द्वारा अपने बच्चों का विचित्र नाम रखने की प्रवृत्ति को गलत बताते हुए कहा कि नाम का बहुत बड़ा महत्व है। अब किसी का चिरकुट या घूरहु नाम रख दिजिए तो क्या असर होगा ?

स्वामी जी ने कहा कि हम सभी से जाने अनजाने पाप कर्म होते रहता है, जिससे मुक्ति के लिए पूजा पाठ दान धर्म तीर्थ यात्रा आदि करना चाहिए। स्वामी जी द्वारा गाए भजन “तारा है सारा जमाना श्याम हमको भी तारो” पर सभी भक्त आह्लादित होकर भावविभोर हो गये।

उधर काशी से पधारे पूज्य पंडित श्री विश्वकांताचार्य जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के पांचवें दिन की कथा का विस्तार करते हुए भगवान श्रीकृष्ण की नंदगांव तथा वृंदावन की लीलाओं का संगीतमय वर्णन करते हुए श्री कृष्ण कन्हैया द्वारा कालिया नाग मर्दन, इंद्र के अहंकार को तोड़ने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठ उंगली पर उठाना और ब्रजवासियों की रक्षा करना। सुदामा, श्रीदामा और मधुमंगल जैसे सखाओं के साथ गाय चराना, बांसुरी बजाना और वृन्दावन में गोपियों के साथ रास रचाना आदि की मधुर प्रस्तुति किया। नंदगांव में रहते हुए ही श्रीकृष्ण ने बकासुर, अघासुर, वत्सासुर और पूतना जैसे असुरों का उद्धार किया, जो उनके कंस वध की यात्रा का आरंभ था।

यह पूरा प्रसंग जीव को सांसारिक मोह-माया से निकालकर विशुद्ध भक्ति और प्रेम की ओर प्रेरित करता है। “उतारो हे सखी उतारो हे सखी राधेश्याम जी की आरती उतारो हे सखी” गाकर आरती करने के साथ ही पांचवें दिन की कथा का समापन हुआ। मौके पर ज्ञान यज्ञ समिति के अध्यक्ष महेन्द्र नाथ ओझा, विधान पार्षद अशोक पाण्डेय, पन्ना उपाध्याय, सुरेन्द्र ओझा, प्रोफेसर डॉ दीपक ओझा, तेज नारायण ओझा, शत्रुघ्न चौबे, रास गोविंद ओझा, पप्पन ओझा, संत शरण साह, जितेन्द्र ओझा तथा मीडिया प्रभारी डॉ अजय ओझा सहित गांव-जवार के हजारों श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे।

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