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मउडिहरा गांव में धूमधाम से शुरू हुआ सात दिवसीय श्रीमद्भागवत पुराण कथा ज्ञान यज्ञ।

29 को पधारेंगे  परम पूज्य श्री जीयर स्वामी जी महाराज।

मउडिरा/नटवार(डॉ अजय ओझा, वरिष्ठ पत्रकार)28 मई।रोहतास जिला अंतर्गत दिनारा प्रखंड के अंतर्गत नटवार के समीप स्थित मउडिहरा गांव में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत पुराण कथा ज्ञान यज्ञ धूमधाम से शुरू हुआ। यह ज्ञान यज्ञ परम पूज्य श्री लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी जी महाराज के मंगलानुशासन में 27 मई से लेकर 2 जून तक चलेगा। श्री जीयर स्वामी जी 29 मई से लेकर 2 जून तक मौजूद रहेंगे।
संगीतमयी श्रीमद्भागवत पुराण कथा का शुभारंभ वाराणसी के सुप्रसिद्ध कथावाचक संत विश्वाकांताचार्य जी महाराज ने किया। वे देश के एक प्रतिष्ठित कथावाचक और विद्वान हैं, जो मुख्य रूप से श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा का रसपान कराते हैं। ज्ञान यज्ञ में कथा की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि बहुत पुण्य जब इक्ट्ठा होता है तो किसी गांव में ज्ञान यज्ञ होता है। उन्होंने कहा कि भागवत पुराण को सभी पुराणों में सर्वोत्तम और वेदों का सार माना जाता है। भागवत पुराण हिन्दुओं के अट्ठारह पुराणों में से एक है। श्रीमद्भागवत महापुराण सनातन धर्म का अत्यंत पवित्र और पूजनीय ग्रंथ है। इसका मुख्य उद्देश्य मनुष्य को ज्ञान, भक्ति और वैराग्य के मार्ग पर ले जाकर परमपिता परमात्मा की प्राप्ति और मोक्ष दिलाना है। इसमें कुल 12 स्कंध और 18,000 श्लोक हैं।
यह पावन कथा नैमिषारण्य में सूत जी द्वारा शौनकादि ऋषियों को सुनाई गई थी। उन्होंने बताया कि कैसे महर्षि वेदव्यास जी ने वेदों का विभाजन और महाभारत जैसे ग्रंथों की रचना की, लेकिन फिर भी उनके मन को शांति नहीं मिली। तब देवर्षि नारद की प्रेरणा से उन्होंने महापुराण की रचना की।
विश्वाकांताचार्य जी महाराज ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा मुख्य रूप से राजा परीक्षित को सुनाई गई थी। परीक्षित जी को श्रृंगी ऋषि ने श्राप दिया था कि सातवें दिन तक्षक नाग के काटने से उनकी मृत्यु हो जाएगी। मृत्यु के भय से मुक्ति पाने के लिए परीक्षित जी ने अन्न-जल त्याग दिया और गंगा के तट पर बैठ गए। तब ब्रह्मर्षि शुकदेव जी (महर्षि वेदव्यास के पुत्र) वहाँ पधारे। उन्होंने परीक्षित जी को सात दिनों तक यह कथा सुनाई जिसे सुनने के लिए सभी देवगण अमृत कलश लेकर कथा स्थल पर पहुंच गए । देवताओं ने ऋषियों से मोलभाव करते हुए कहा कि राजा परीक्षित मृत्यु के भय से यह कथा सुन रहे हैं। वे अमृत पीकर मृत्यु के भय से मुक्त हो जायें और हमें कथा श्रवण करने दें क्योंकि स्वर्ग में श्रीमद्भागवत कथा नहीं होती। ऐसी अपरंपार महिमा है श्रीमद्भागवत कथा की।
श्री विश्वकांताचार्य जी महाराज ने कहा कि भागवत कथा का मुख्य उद्देश्य है – परमपिता परमात्मा की प्राप्ति। यह कथा हमें संसार से भागना नहीं सिखाती, बल्कि संसार में रहते हुए भगवान से जुड़ना सिखाती है। यह पावन पुराण श्रीमद्भागवत महापुराण आयु, आरोग्य और पुष्टिको देनेवाला है; इसका पाठ अथवा श्रवण करने से मनुष्य सब पापों से मुक्त हो जाता है।
कथा को अगले दिन तक विश्राम देते हुए उन्होंने जयकारी लगाते हुए कहा कि जयकारी की गूंज से डाकिनी, शाकनी तथा भूत-पिशाच समेत आसुरी शक्तियां पलायन कर जाती हैं। मौके पर महेंद्र नाथ ओझा, सर्वदेव ओझा, राजगृही ओझा, तेज नारायण ओझा, रास गोविंद ओझा, धर्मेन्द्र ओझा, सत्येन्द्र ओझा, दीनानाथ पासवान, मीडिया प्रभारी डॉ अजय ओझा सहित बड़ी संख्या में गांव-जवार के श्रद्धालु उपस्थित थे।

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