फरीया के रही (13-12-01 संसद पर आक्रमण)
कतनों होइबऽ आतंकी के नाती, भूल जा तू तरनाइल;
बहुत दिनन से चुप लगइ ली, अव की तोहरी बुझाई।
फिर से तनिको तू तरनइल, लोला तोहर थुराई; नाचत फिरव देशा-देशी, केहू ना अबो बचाई।
सैन्यतंत्र के सोखे तुहूँ लोकतंत्र से चाहऽ लड़ाई; फउक मत तू ढेर, तोहरो अबकी घेटीं दाबल जाई।
13 दिसम्बर दिन वीफे के, जे कइल करतूतः संसद पर हमला जे कइलऽ, अबतऽ भइल बहुत।
अवकी पारी फरिया के रही, आर-पार के लड़बऽ लड़ाई, छछन-छछन के मुअबऽ तुहू, रिश्तेदारन के लोर नाही सुखाई।
लश्कर, जैश के हम ना बुझी, के सईद के अजहर ह, उनका के त पकड़ सिखाइब, कइसन तीरछोल उ अगहर ह।
संसद हउवे हमर करेजा लोकतंत्र के, ओकर मान ना झूके देव;
जे. पी. यादव, कमलेश कुमारी के कुर्बानी के, कबहू नाहीं भूले देब।
साज सेना अटल बिहारी, छोड़ बतिआवल ना-पाक से; छोड़ऽ आगरा, लाहौर के बस भी छोड़ऽ
खींच शिमला के वाण, ताशकंद के तरकस से।
कारगिल के दुश्मन, लालकिला के आतंकी के, अब की बार ना छोड़े के;
अइसन पाठ पढ़ाव, आवे याद छठी के दूध अवकी ना छोड़ के संसद पर हमला जे कइले, लक्ष्मण रेखा पहिले उ तूड़ले बा;
हर जवान हनुमान यो एन, हर जवान अंगद वा।
हर किसान, हर मजदूर बा एने जामवन्त नल-नील; रही ह अटल, अटल जी अबकी, मत दी ह तू ढील।
तनिको ढील अगर तू देलऽ देश के देवे पड़ी जवाब,
जे जोमें में अइठल रहे, नाथ दीह ओकरा थुथुना में जाव।
हुक्का के पानी के फेरा में हमनी के न परे के,
बईठईले बानी दिल में आपन रक्षा आप करके,
शांति से रहल जे चाहे त हमहू शांति पूजारी हई,
पहन न रखले बानी चूड़ी के ठसका वाला खातिर,
हमहू धुरंधारी हई।
एही राहें कश्मीर में शांति आई ,भारत देश हो जाई निहाल,
जब परिधि काबू में रही,बीच त अपने हो जाई खुशहाल।


