आरा/भोजपुर 26 अप्रैल।राष्ट्रीय कुंवर सेना द्वारा 23 अप्रैल को वीर बांकुड़ा बाबू वीर कुंवर सिंह जी के 166वीं विजय दिवस, सर्वप्रथम विभिन्न स्थलों पर वीर कुंवर सिंह पार्क स्थित घुड़सवार आदम कद प्रतिमा महाराजा कॉलेज परिसर स्थित प्रतिमा तदुपरांत वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के परिसर के मुख्य प्रतिमा एवं प्रति कुलपति के चेंबर कुलसचिव के चेंबर कुलनुशासन के चेंबर के तैल्यचित्र पर माल्यार्पण कर अमर शहीद वीर बांकुड़ा अमर रहे! अमर रहे! अमर रहे! नारों के साथ किया गया। उसके बाद राष्ट्रीय कुंवर सेना अध्यक्ष श्री निर्मल सिंह शक्ररवार की अध्यक्षता में परिचर्चा का आयोजन “वीर कुंवर सिंह एवं उनके शहादत की प्रासंगिकता” विषय पर परिचर्चा किया गया।
विषय पर प्रकाश डालते हुए श्री निर्मल सिंह शक्ररवार ने कहा कि वीर कुंवर सिंह की शहादत को हम कुंँवर सेनानी व्यर्थ नहीं जाने देंगे। राष्ट्रीय कुंवर सेना स्थापना काल से ही भ्रष्टाचार के खिलाफ, जोर जुल्म के खिलाफ शाहाबाद के उत्थान में इस शहादत की बलिदानी परंपरा को कायम रखा है।शहीद राजनाथ, शहीद सर्वेश्वर पांडे इसके जीवंत उदाहरण है।
बतौर मुख्य अतिथि डॉ शशि बाबा ने कहा,वैश्विक पटल पर भोजपुर को रेखांकित करने वाले ऐतिहासिक महापुरुष का नाम ही वीर कुंवर सिंह है।यदि हमको भोजपुर में जगह बनानी है तो कुंवर सिंह को आत्मसात करना ही पड़ेगा। आज दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आज का युवा वर्ग एवं उससे भी बड़ी दुख की बात है कि शिक्षित वर्ग भी शहादत को भूलते जा रहे हैं। राष्ट्रीय कुंवर सेना इस दिशा में काम कर रहा है यह काबिले तारीफ है। संरक्षक बाबू बद्री विशाल सिंह शहादत को याद करते हुए रो पड़े। सभा का संचालन ठाकुर राज किशोर सिंह राष्ट्रीय कुंवर सेना,महामंत्री ने कहा कि भोजपुर वासियों को आगे आकर संकल्प लेना होगा और शाहाबाद के निर्माण में कुंवर सिंह के शहादत को व्यर्थ नहीं जाने देना होगा। वक्ता पिंकी देवी ने कहां कि यदि हम लोग गदर के समय सचेत हो गए होते तो आजादी 1857 में मिल गई होती लेकिन दुर्भाग्य के साथ कहना है आज भी अभिव्यक्ति की आजादी और संस्कृति आजादी पर मिलकर काम करना होगा। उपस्थित लोगों में डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद सिंह महासचिव राष्ट्रीय सेना,महंत सिंह मुखिया ठाकुर संजय सिंह सचिव राष्ट्रीय कुंवर सेना,धर्म योद्धा एस पी सिंह संरक्षक कन्हैया सिंह महाप्रभु सचिव रविंद्र रजक ,सोनू सिंह टाइगर संजीत कुमारशिवम राजपूत मनोज सिंह मृत्युंजय सिंह मुन्ना सिंह आदि प्रमुख थे।


