
RKTV NEWS/गोपालगंज(बिहार)05 फ़रवरी।बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित सतत् जीविकोपार्जन योजना (SJY) के अंतर्गत गोपालगंज जिले में गरीब और अत्यंत निर्धन परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
इस योजना के तहत कुल 3,377 परिवारों को सहायता प्रदान की गई, जिससे वे सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर स्थायी आजीविका की ओर अग्रसर हो सके।
अत्यंत निर्धन परिवारों की पहचान और सहायता
सरकार ने उन परिवारों की पहचान की, जो आर्थिक रूप से अत्यधिक कमजोर थे और पारंपरिक अस्थिर आय स्रोतों पर निर्भर थे।
इनमें प्रमुख रूप से 615 परिवार देशी शराब के उत्पादन और बिक्री से जुड़े थे।
209 परिवार ताड़ी के उत्पादन और बिक्री में संलग्न थे।
इन परिवारों को वैकल्पिक, स्थायी और सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराने हेतु जीविका कार्यक्रम के अंतर्गत जोड़ा गया।
वित्तीय सहायता से मिली राहत
सतत जीविकोपार्जन योजना केअंतर्गत 3,078 परिवारों को सात माह तक ₹1,000 प्रति माह की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।
इस सहयोग से उन्हें तत्कालीन वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिली और साथ ही नए आय स्रोत विकसित करने का अवसर भी प्राप्त हुआ।
परिसंपत्ति निर्माण और स्वरोजगार को बढ़ावा
इस योजना के तहत 3,356 परिवारों को विभिन्न प्रकार की परिसंपत्तियाँ बनाने के लिए सहायता दी गई—2,237 परिवारों को सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की गई।
1,108 परिवारों को पशुपालन के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।
11 परिवारों ने कृषि क्षेत्र में योगदान दिया और सरकार द्वारा आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए।
वित्तीय समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
सरकारी योजनाओं का पूरा लाभ प्राप्त करने के लिए 3,367 परिवारों के बैंक खाते खोले गए, ताकि उन्हें प्रत्यक्ष रूप से आर्थिक सहायता मिल सके। इससे न केवल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला, बल्कि सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाने में भी पारदर्शिता आई।
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की पहल
गरीब परिवारों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से 2,825 परिवारों को राशन कार्ड उपलब्ध कराए गए, जिससे उन्हें न्यूनतम मूल्य पर खाद्य सामग्री प्राप्त हो सके। इस पहल ने इन परिवारों के जीवन स्तर को सुधारने में अहम भूमिका निभाई।
योजना के सफल लाभार्थी
इस योजना के माध्यम से कई परिवारों ने न केवल अपनी गरीबी से बाहर निकलने का मार्ग खोजा, बल्कि वे सफल उद्यमी भी बने। इनमें प्रमुख उदाहरण है,रानी खातून ने किराने की दुकान, आटा चक्की और बकरी पालन शुरू किया। अब उनकी मासिक आय ₹10,570 हो गई है।
वहीं रुबीना प्रवीण ने कपड़ा और किराना व्यवसाय शुरू किया और अब ₹11,150 मासिक कमाती हैं।
राजमती देवी ने आटा चक्की, कपड़ा दुकान, नाश्ता दुकान और बकरी पालन से ₹12,577 मासिक कमाई शुरू की।
पूनम शर्मा ने सिलाई मशीन, ज़ेरॉक्स मशीन और कोल्ड ड्रिंक व्यवसाय से ₹7,935 की मासिक आय प्राप्त की।
राशिदा खातून ने किराने की दुकान और आटा चक्की के जरिए ₹8,702 की मासिक कमाई शुरू की।
जिला पदाधिकारी गोपालगंज प्रशांत कुमार सी एच द्वारा सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को धरातल पर उतरने के लिए संबंधित विभागों के पदाधिकारीयों की निरंतर समीक्षा के साथ दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं, जिसके फलस्वरूप सतत् जीविकोपार्जन योजना के अंतर्गत गोपालगंज जिले में बड़ी संख्या में परिवारों को आर्थिक स्वतंत्रता मिली है। यह पहल गरीबी उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
जिला पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि सरकार इस योजना को और विस्तार देने तथा अधिक से अधिक परिवारों को इससे जोड़ने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम और स्वावलंबन पर विशेष ध्यान देने की योजना बना रही है।
