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कभी निराशा में छोड़ दी थी पढाई, फिर पहले ही प्रयास में बन गए सीए।

आज अपने काम के अलावा समाजसेवा और स्टूडेंट्स की मदद भी करते हैं श्रीराम।

नई दिल्ली/राहुल ढींगरा 21 अप्रैल।“कौन कहता है कि आसमां में सुराग नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों”| कभी निराशा में सीए की पढाई छोड़ देने वाले श्रीराम अटल ने इस कहावत की तर्ज पर वापसी करते हुए 22 साल की उम्र में पहले ही प्रयास में सीए की परीक्षा पास की और सीए बन गए। सीए इंटर का रिजल्ट उनकी जिंदगी में टर्निंग पॉइंट साबित हुआ| इसके बाद उन्होंने दुगुने जोश से सीए की पढाई की और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की।आइए जानते हैं सीए श्रीराम अटल की सफ़लता की कहानी।

परिवार में सबसे छोटे हैं श्रीराम

श्रीराम राजस्थान के एक छोटे गाँव निम्बी जोधा से हैं|उनके पिता गौरीशंकर अटल पहले पत्रकारिता में थे, बाद में वे एक डीड राइटर बन गए|माता-पिता के अलावा घर में वे 5 भाई-बहन हैं।श्रीराम घर में चार बहनों के बाद सबसे छोटे हैं। डीड राइटर के काम से इतने बड़े परिवार का पालन-पोषण काफी मुश्किल से हो पाटा था, लेकिन पिता ने सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों की पढाई में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी| बचपन में जब श्रीराम दुसरे बच्चों को साइकिल पर देखते थे, तो उनका भी बहुत मन होता था, लेकिन घर की तंगहाली को देखते हुए उन्होंने कभी किसी से कुछ नहीं कहा।

पढाई में थे होशियार, पिता बने प्रेरणास्रोत:

श्रीराम बचपन से ही पढाई में बहुत होशियार थे। इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कक्षा 9 से लेकर सीए तक वे तमाम परीक्षाओं में टॉपर रहे| बारहवीं कक्षा में तो राजस्थान में उनकी 49वी रैंक रही। इसके बाद साल 2001 से लेकर साल 2005 तक उन्होंने पिता के साथ डीड राइटिंग का काम भी किया। पढाई में उनके बेहतरीन प्रदर्शन को देखते हुए उनके पिता ने उन्हें सीए बनने के लिए प्रेरित किया।

सीए शुरू किया, निराशा में छोड़ी पढाई, सीए इंटर के रिजल्ट ने बदली जिंदगी:

पिता के कहने पर सीए इंटर की पढाई करने श्रीराम कोलकाता पहुंचे।लेकिन उनके पास महंगी कोचिंग और हॉस्टल की फीस के लिए पैसे नहीं थे।उन्होंने एक किफायती छात्रावास में इंटरव्यू दिया और उन्हें वहां दाखिला मिल गया।लेकिन उनके आसपास के लोग उनसे कहते थे कि सीए सबके बस की बात नहीं है| लोग सालों तक मेहनत करने के बाद थक-हारकर पढाई छोड़ देते हैं|श्रीराम ने मेहनत करके जैसे-तैसे सीए इंटर की परीक्षा दी| लेकिन निराश हो कर पिता का हाथ बंटाने के उद्देश्य से गाँव लौट गए|तभी दो महीने बाद सीए इंटर का रिजल्ट आया| श्रीराम ने पहले प्रयास में ही अच्छे अंकों से परीक्षा पास कर ली थी| परिवार की ख़ुशी का ठिकाना नहीं था, सभी ने उनकी हौंसला अफजाई की|यहीं से उनकी जिंदगी बदली और उन्होंने ठान लिया कि अब सीए ही बनना है| इसके बाद सीए फाइनल की तैयारी के लिए वे दिल्ली आ गए।

सुबह क्लास, शाम को पार्ट टाइम जॉब:

बिना रेफरेंस के आर्टिकलशिप मिलने में श्रीराम को काफी दिक्कतें आईं| लेकिन आर्टिकलशिप मिलने के बाद उनकी दिनचर्या काफी व्यस्त हो गई|वो सुबह 5 बजे उठते। 6 बजे से 10 बजे तक कोचिंग क्लास जाते।वहां से सीधे आर्टिकलशिप पर जाते।वहां से निकलकर शाम को दो दुकानों पर खाते देखने की पार्ट टाइम जॉब करते| इसके बाद घर आकर खाना खाकर फिर 3 घंटे पढाई करते।

सीए बने, जॉब की, अपनी फर्म बनाई अब समाजसेवा भी करते हैं

श्रीराम 2009 में सीए बने 2010 में कैंपस प्लेसमेंट के तहत उन्हें भूषण स्टील में असिस्टेंट मेनेजर की जॉब मिल गई|लेकिन कुछ वर्ष बाद अपना कुछ करने की छह में 14 लाख रूपए के पैकेज की जॉब छोड़ कर अपनी सीए फर्म शुरू की|उनकी कंपनी आज 3 राज्यों में काम कर रही है| श्रीराम अब अपने काम के अलावा तमाम तरह की समाजसेवा में जुटे हैं, साथ ही वे स्टूडेंट्स की मदद भी करते हैं|कोरोना के दौरान उन्होंने अपने गाँव में 15 बिस्तर का कोविड सेंटर भी बनवाया था।

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