
हरे कृष्णा..!
मुझी में कहीं तू समाया हुआ है।
मुझी को मुझी से छुपाया हुआ है।
सदा बात करते रहे हम तुझी से,
तुझे जबकि दिल में बसाया हुआ है।
रहा साथ मेरे सदा हर कदम तू,
नहीं तू कभी भी पराया हुआ है।
मुसीबत भरा दौर जब भी गुजरता,
कन्हैया तुझी ने निभाया हुआ है।
नचाता जगत को बजा एक चुटकी,
तुझे गोपियों ने नचाया हुआ है।
पवित प्यार में जो डुबो दें खुदी को,
उसी ने तुझे शाम पाया हुआ है।।
(साभार शब्दों की सरिता मंच)

