पूर्वी चंपारण/बिहार 11 दिसंबर। भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने को लेकर प्रगतिशील भोजपुरी समाज की पूर्वी चंपारण इकाई द्वारा आज एक दिवसीय धरना दिया गया।
धरना में मुख्य वक्ता के रूप में संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व सारण स्नातक प्रत्यासी ध्रुव नारायण प्रसाद ने कहा की भोजपुरी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया जाना चिंतनीय और निंदनीय है। उन्होंने कहा की मातृभाषा ही हमारी भावनात्मक एवं वैचारिक अभियावक्ति का सुगम और सुस्पष्ट माध्यम है। भोजपुरी भाषा को मान्यता नही मिलने से भोजपुरिया समाज मानसिक विकास अवरूद्ध हो जाता है और मन कुंठित हो जाता है।उन्होंने बताया की आज पश्चिमी बिहार ,पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के 27 जिलों में करोड़ों भोजपुरिया लोगो को भोजपुरी भाषा के संवैधानिक मान्यता नही मिलने के कारण भाषाई अवदमन का शिकार होना पड़ रहा है।भोजपुरी में किसी भी उन्नत भाषा के सभी गुण और लक्षण मौजूद हैं।भोजपुरी व्याकरण शब्दकोश लोक संस्कृति और लिखित साहित्य अत्यंत समृद्ध है।इस क्षेत्र में कोई बड़े कल कारखाने नही है जो यहां के किसानों मजदूरों को रोजगार प्राप्त हो सके 70 प्रतिशत लोगो की सामाजिक, आर्थिक सांस्कृतिक अति दयनीय है।मातृभाषा के अवदमन से भोजपुरी भाषाई लोग हीन भावना से ग्रस्त है।
प्रदेश अध्यक्ष ध्रुव नारायण ने सभी सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों में भी काम काज भोजपुरी भाषा में कराने की मांग की।
धरने में जिला सचिव अर्शफी पंडित ने अपने संबोधन में कहा की चंपारण संघर्षों की भूमि है ।इसी भूमि से अंग्रेजों को खदेड़कर भगाया गया था और यहीं से स्वतंत्रता आंदोलन का आगाज हुआ था।भोजपुरी भाषा को भी आठवी अनुसूची में शामिल कराने के लिए इसी जिला से सड़क से सदन तक का आंदोलन किया जायेगा।बोल चाल के रूप में भोजपुरी भाषा काफी प्रचलित तो हैं लेकिन संवैधानिक मान्यता ही इसका सम्मान होगा जो सरकार को देना ही पड़ेगा। सदन में भी भोजपुरी भाषाई क्षेत्र के कई सांसद रवि किशन,मनोज तिवारी,दिनेश लाल यादव निरहुआ,जगदंबिका पाल आदि ने भी भोजपुरी को आठवीं में मान्यता दिलाने हेतु आवाज उठाई लेकिन अभी तक सरकार द्वारा इसे मान्यता नही दी गई। इसे मान्यता दिलाने के लिए आंदोलन किया जायेगा।
सभा को सम्बोधित करते हुए बिनोद कुमार श्रीवास्तव ने कहा की भोजपुरी भाषा एक मीठी भाषा है भोजपुरी क्षेत्र के बहुत सारे संत,साहित्यकार और नेता हुए है और सभी ने इसे मान्यता दिलाने का आवाज उठाया।
धरना में शामिल होने वाले लोगो में मुख्य रूप से अशोक यादव, डॉ बी तिवारी,राम भजन राम,शिव जी राय, रामाकांत प्रसाद,यादव लाल प्रसाद,श्याम जी,शेषनाथ साह,भोला राय सत्येंद्र प्रसाद,सुशील कुमार,अजीत कुमार, सुरेश गिरी थे।

next post
