आरा/भोजपुर 30 नवंबर।लीजेंड बक्शी कुलदीप नारायण सिन्हा मेमोरियल कल्चरल सोसायटी के तत्वाधान में आयोजित साप्ताहिक कार्यक्रम गुरुवासरे संगीत सभा का उद्घाटन कवियित्री डॉ. ममता मिश्रा ने ने दीप प्रज्जवलित कर किया। स्थानीय महाजन टोली स्थित ठाकुरबाड़ी प्रांगण में इस सांगीतिक सभा को संबोधित करते हुये ममता मिश्रा ने कहा कि नृत्य कला में सिद्धस्त होने के कारण ही कृष्ण को नटवर के रूप में पूजा गया तो शिव को नटराज के रूप में। नृत्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं अपितु साधना व आराधना है। भारतवर्ष में नृत्य के एक से बढ़कर एक नर्तक व नृत्यांगनाओं का सृजन हुआ। इस अवसर पर दूरदर्शन की कलाकार खुशी कुमारी गुप्ता ने कथक नृत्य की शुरुआत भगवान शिव की स्तुति “डमरू हर कर बाजी डिम डिम” से करते हुये ताल पंचम सवारी में उपज, ठाट, आमद, परन, तिहाई लड़ी प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं कथक प्रस्तुतिके समापन में खुशी ने ठुमरी ” डगर बीच कैसे चलूँ मग रोके कन्हैया बेपीर पर कृष्ण राधा के रास की मनोहारी प्रस्तुति की। हारमोनियम पर अजीत पाण्डेय व तबले पर गुरु बक्शी विकास ने संगत किया। मंच संचालन शंभू शरण ओझा व धन्यवाद ज्ञापन संयोजक अमित कुमार ने किया। इस अवसर पर प्रोफेसर विश्वनाथ राय, दिनेश्वर प्रसाद, राणा प्रताप सिन्हा , तबला वादक कृष्ण कान्त मानस , महंत रामाशीष दास, शास्त्रीय गायक महेश यादव रवि शंकर, स्नेहा पाण्डेय, संरक्षक सुशील कुमार ‘देहाती’, श्रेया पाण्डेय समेत कई संगीत रसिक व प्रशिक्षु उपस्थित थे।
