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क्रिकेट के दिग्गज मुथैया मुरलीधरन ने भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के 54वें संस्करण में अपनी बायोपिक पर आयोजित संवाद सत्र में भाग लिया।

गोवा/27 नवंबर।गोवा में चल रहे भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के 54वें संस्करण में महान क्रिकेटर गेंदबाज मुथैया मुरलीधरन के साथ एक विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। इसमें मधुर मित्तल भी शामिल हुए, जिन्होंने स्पिन गेंदबाजी के जादूगर की बायोपिक ‘ए लेजेंडरी 800 – अगेंस्ट ऑल ऑड्स’ में मुरलीधरन की भूमिका निभाई है। यह कार्यक्रम आज के मुख्य आकर्षणों में से एक था।
कोमल नाहटा द्वारा संचालित सत्र में मुथैया मुरलीधरन के गुमनामी के समय से क्रिकेट की दिग्गज हस्ती बनने तक की यात्रा की गहराई पर प्रकाश डाला गया।
मुथैया मुरलीधरन ने इस वार्तालाप में अपने जीवन की असाधारण कहानी को साझा किया, जो श्रीलंका में युद्ध और अनिश्चितता की पृष्ठभूमि के बीच शुरू हुई थी। उन्होंने अपने संघर्ष एवं जिजीविषा को भी याद किया, जो क्रिकेट के दिग्गज बनने के लिए जीवन में आने वाली सभी बाधाओं को पार कर गई। मुरली ने कहा कि उस उथल-पुथल भरे समय में क्रिकेट ही उनका सहारा था। उन्होंने अपने बचपन के सपनों को भी याद किया, जिसमें अपने देश का प्रतिनिधित्व करना तो दूर की बात है, अपने स्कूल के लिए खेलना भी शामिल नहीं था।
मुरली ने अपने जीवन पर आधारित आगामी बायोपिक पर चर्चा करते हुए इसकी प्रामाणिकता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यह फिल्म महिमामंडन के बारे में नहीं है; यह सच्चाई के बारे में है। मुरली ने बताया, “यह सुनिश्चित करने के लिए कि फिल्म की कहानी उनके संघर्षों और सफलता के प्रति विश्वसनीय रहे, स्क्रिप्ट की कई बार सावधानीपूर्वक जांच की गई थी।”
वर्ष 1995 में ऑस्ट्रेलिया में अपने गेंदबाजी एक्शन पर लगे ‘चकिंग विवाद’ के बारे में बात करते हुए मुरली ने दावा किया कि यह उन्हें नीचा दिखाने के लिए जानबूझकर किया गया कार्य था। उन्होंने कहा कि यह घटनाक्रम उनके लिए काफी हृदयविदारक था लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और वे अपने संगी-साथियों तथा क्रिकेट बोर्ड के लगातार सहयोग से आगे बढ़ते रहे।
क्रिकेट जीवन में अपने संघर्षों और उथल-पुथल भरी घटनाओं के बारे में बताते हुए मुथैया मुरलीधरन ने कहा कि उनके खेल जीवन की सबसे बुरी घटना पाकिस्तान में श्रीलंका की क्रिकेट टीम पर हुआ हमला था।
मुथैया मुरलीधरन परोपकारी कार्यों के लिए एक धर्मार्थ संगठन फाउंडेशन ऑफ गुडनेस चला रहे हैं। उनका संगठन सीनिगामा क्षेत्र की भलाई के लिए कार्य करता है और बच्चों की आवश्यकताओं, शिक्षा एवं प्रशिक्षण, स्वास्थ्य देखभाल व मनो-सामाजिक सहायता, आवास, आजीविका, खेल तथा पर्यावरण सहित कई क्षेत्रों में परियोजनाओं के माध्यम से स्थानीय समुदायों को सहयोग प्रदान करता है।
फिल्म के निर्देशक श्रीपति एम ने खुलासा किया कि यह फिल्म केवल एक ख्यातिप्राप्त क्रिकेटर का चरित्र चित्रण नहीं कर रही है, बल्कि उन उथल-पुथल भरी घटनाओं एवं संघर्षों को समाहित करती है, जिन्होंने मुरलीधरन के असाधारण जीवन को आकार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फिल्म को बनाने का लक्ष्य एक दिग्गज में समाहित गुणों एवं भावों को प्रकट करना है, जिसकी जीवन यात्रा मैदान के बाहर भी उतनी ही प्रभावशाली थी, जितनी खेल के मैदान पर थी।
श्रीपति ने इस बायोपिक को बनाने के लिए जानकारी देते हुए बताया कि इसमें कोई टेम्प्लेट या स्क्रीनप्ले प्रारूप नहीं है। उन्होंने कहा कि हम एक ऐसे दिग्गज की सच्ची कहानी बनाना चाहते थे, जिसकी निजी और पेशेवर जिंदगी को संभालना बहुत असाधारण है।
फिल्म में मुथैया मुरलीधरन का किरदार निभा रहे मधुर मित्तल ने कहा कि यह एक स्पोर्ट्स फिल्म से कहीं बढ़कर है। उन्होंने कहा कि यह एक महान खिलाड़ी के जीवन का मानवीय घटनाचक्र है, जो कल्पना से भी अधिक सशक्त है। सात साल की उम्र में कहीं प्यार ना हो जाए से लेकर इस फिल्म में मुरली का किरदार निभाने तक की अपनी अभिनय यात्रा पर विचार व्यक्त करते हुए मधुर ने कहा कि बायोपिक में क्रिकेट के दिग्गज की भूमिका निभाना बहुत ही रोमांचक और सम्मान की बात थी। मधुर ने यह भी बताया कि स्पिन जादूगर के गेंदबाजी एक्शन का अनुकरण करने और मुरली की विरासत का सम्मान रखने के लिए उन्होंने दो महीने तक एक गेंदबाजी कोच के साथ इसका अभ्यास भी किया है।
प्रति टेस्ट क्रिकेट मैच में औसतन छह विकेट लेने वाले मुरलीधरन को इस खेल के इतिहास में सबसे महान गेंदबाजों में से एक माना जाता है। वह 800 टेस्ट विकेट और 530 से अधिक एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय (ओडीआई) विकेट लेने वाले एकमात्र गेंदबाज हैं। मुरलीधरन 1996 क्रिकेट विश्व कप जीतने वाली श्रीलंकाई टीम का हिस्सा थे।

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