आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 15 नवंबर।भगवान चित्रगुप्त का पूजन सृष्टि के आरंभ कल से चला आ रहा है। भगवान चित्रगुप्त के वंशज इस दिन पूरी श्रद्धा भक्ति से भगवान चित्रगुप्त की पूजा करते हैं। अवतरण के समय के हाथ में कलम दवात था। जिसके माध्यम से पाप- पुण्य, न्याय- अन्याय करने की जिम्मेदारी मिली थी। यही कारण है की समस्या वंशज कलम दवात की पूजा करते हैं लिखनी नहीं उठाते हैं।
आरा शहर के बीचों-बीच बाबू बाजार मुहल्ला में प्राचीन श्री चित्रगुप्त मंदिर है जिसकी स्थापना 1887 में लाल बेनी प्रसाद ने अपनी निजी संपत्ति से मंदिर और उसके आसपास भवन बनाए गए थे ताकि समाज के जरुरत मंदों को समुचित उत्थान हो सके। मंदिर लाल बेनी प्रसाद के लिखे गए डीड के आधार पर मंदिर प्रबंध समिति सभी विधि व्यवस्था और संचालन का कार्य देखती है।देखते हैं और सभी कार्यों का निष्पादन करती है।
डिड के मुताबिक मंदिर के के मूतवाली या प्रबंधक दिनेश प्रसाद मुन्ना अधिकृत रूप से है। जिनके नेतृत्व में छह लोगों की एक समिति है। यही मंदिर की अधिकृत कमेटी है। यह शाहाबाद का अति प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर कायस्थ बिरादरी को विरासत में मिली है। मंदिर प्रबंध समिति अखिल भारतीय कायस्थ महासभा द्वारा संचालित होता है जिसके अध्यक्ष पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर सच्चिदानंद सहाय है।
शहर में जो कमेटी पूजा में लगी है उसमें चित्रगुप्त सेवा समिति हाउसिंग कॉलोनी चंदवा आरा जिसके अध्यक्ष सुरेश चंद्र वर्मा और सचिव सतीश चंद्र श्रीवास्तव जी हैं।
श्री चित्रगुप्त चित्रगुप्त परिवार आरा जिसका आयोजन स्थल आइ एम ए हॉल में हो रहा है जिसके अध्यक्ष पंकज कुमार सचिव राकेश रंजन प्रसाद सिंहा तथा कोषाध्यक्ष डॉक्टर अमर्त्य राज हैं।
वही चित्रांश समिति नवीन विद्यालय आरा में प्रतिवर्ष की भांति इस बार भी पूजा कर रही है इसके संयोजक डॉक्टर के एन सिन्हा और सह संयोजक कुमार निर्मल है।

