आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा) 28 अगस्त।आरा को धर्म नगरी के नाम से भी जाना जाता है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में एक से एक प्राचीन मंदिरों का इतिहास है जिसमें बुढ़वा महादेव मंदिर ,सिद्धनाथ मंदिर, मां आरण्य देवी का मंदिर आदिकाल से विख्यात है।सावन माह की अंतिम सोमवारी पर बाबा जागेश्वर नाथ उर्फ बुढ़वा महादेव मंदिर में विशेष तैयारी की गयी थी।मलमास माह का अंतिम सोमवारी होने के कारण सुबह से ही बाबा के दर्शन के लिए, जलाभिषेक करने के लिए, श्रद्धालु भक्तगणों का भीड़ उमड़ता रहा। प्रातः कल से ही मंदिर की घंटी बजने लगी,हर हर महादेव का जयघोष होते रहा, पंक्तिबद्ध होकर पुरुष, महिलाएं गर्भगृह में जाने के लिए उतावला होते रही, वही लगातार मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं का भीड़ बढ़ते रहा। स्वयंसेवको और पुजारी लोगों के सहयोग से भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास चलता रहा। श्रद्धावान लोग कोई जल बेलपत्र फूल ,तो कोई दूध का स्नान, तो कोई बाबा के चरणों में अपना शीश झुकाकर नमन, तो कोई हाथ जोड़कर बाबा से अपनी मन्नत पूर्ण होने की कामना करते हुए। इसी क्रम में मैं भी बाबा भोलेनाथ का शरणागत रहा और सबके खुशहाली की प्रार्थना की। सबसे ज्यादा महिलाएं बाबा के प्रति समर्पित भाव से पूजा करने में लगी रही। मंदिर के प्राचीन कुआं से लगातार स्वयंसेवक जल निकालकर भक्तों को जल पात्र में भरते नजर आए। वही पुजारियों का एक झुंड ललाट पर चंदन का लेप लगाते दिखे।इसके लिए भी पुरुष महिलाएं युवा युवतियों में विशेष रुचि दिखाई पड़ी।पूजन सामग्री के लिए बेचने वालो की ढेला की लंबी कतार लगी रही। यही क्रम लगातार रात तक चलते रहेगी और रात्रि में भजन कीर्तन से अंतिम श्रावण मास का समापन होगा।
