जसम प्रतिरोध की संस्कृति को और तेज़ करने को प्रतिवद्ध : जितेंद्र कुमार

जसम ने स्थापना दिवस के अवसर पर दिवंगत नाना पाटेकर को दी श्रद्धांजलि ।
RKTV NEWS/आरा ( भोजपुर)25 अक्टूबर।स्थानीय बशिष्ठ नगर स्थित ‘जलसा जक्शन हॉल'(वरिष्ठ रंगकर्मी अरुण प्रसाद का आवास ) में आज जन संस्कृति मंच का 41 वाँ स्थापना दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम के आरंभ में जसम, बिहार के अध्यक्ष कवि-आलोचक जितेंद्र कुमार ने संगठन की स्थापना के दौर को याद किया और उसकी जरूरतों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि 1985 का वह दौर साहित्यिक-सांस्कृतिक रूप से समृद्ध तो था परंतु क्रांतिकारी राजनीतिक चेतना का सत्ता के खिलाफ कोई मुखर हस्तक्षेप नहीं सुनाई पड़ रहा था। इसकी मुख्य वजह सांस्कृतिक अंतर्विरोध रहा। ऐसी स्थिति में 26 अक्टूबर, 1985 में जन संस्कृति मंच की स्थापना हुई। इस संगठन ने अपने 40 वर्षों के कार्यकाल में सत्ता के खिलाफ जनता की संस्कृति के पक्ष में एक जोरदार प्रतिपक्ष की भूमिका अदा की है। संचालक सुमन कुमार
सिंह ने बताया कि जसम ने देश भर में लगातार आम जन की संस्कृति को समृद्ध करने में अपनी उर्जा लगाई है। अपने गीतों, नाटकों, कविता-कहानियों, चित्रों आदि तमाम कला माध्यमों को जसम ने सांस्कृतिक अराजकता के खिलाफ जन संस्कृति को विकसित किया है।
कार्यक्रम में ‘प्रतिरोध का सिनेमा’ के रूप में नाना पाटेकर की बहुचर्चित फिल्म ‘थोड़ा सा रुमानी हो जाय’ का प्रदर्शन हुआ और अंत में एक मिनट का मौन रखकर उपस्थित संस्कृतिकर्मियों ने दिवंगत अभिनेता को श्रद्धांजलि दी। जसम के संस्कृति कर्मियों ने प्रतिरोध की आवाज को और मुखर करने तथा सार्थक हस्तक्षेप की प्रतिवद्धता दुहराई।
कार्यक्रम में अध्यक्ष जितेंद्र कुमार, रंगकर्मी शमशाद प्रेम, रंगकर्मी अरुण प्रसाद, इश्तेयाक अहमद, कवि जनार्दन मिश्र, फिजियोथ्रेपिस्ट पिंटू पुष्कर, अमित मेहता, सूर्यप्रकाश, सुधांशु रंजन, सीताराम रवि, डा. नथुनी पाण्डेय, डा. सिद्धनाथ सागर, विक्रांत तथा सुमन कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे। कवि अरुण शीतांश ने दुरभाष द्वारा जसम के स्थापना दिवस समारोह के सफलता की शुभकामनाएँ प्रेषित की।

