
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)25 अप्रैल।जानकी-नवमी के अवसर पर श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् और सनातन-सुरसरि सेवा न्यास के संयुक्त तत्त्वावधान में फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित “श्रीहनुमत्सदन” में श्रीराम दरबार का पूजन-अर्चन संपन्न किया गया।इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए भोजपुर जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष सीनेटर प्रो बलिराज ठाकुर ने कहा कि श्रीराम नवमी की ही तरह जानकी नवमी भी महत्वपूर्ण उत्सव है।मिथिला के महाराजा जनक ने संतान की कामना से यज्ञीय भूमि के अन्वेषण हेतु हल चलाया जिससे माता सीता प्रकट हुईं।उन्होंने कहा कि श्रीराम चरित्र की ही तरह विशद और अनुकरणीय है सीता का चरित्र। सीता चरित्र से आज की नारी शक्ति शील, सदाचार, संयम, संतोष, सहनशीलता और पातिव्रत्य की सीख लेकर परिवार और समाज का उन्नयन कर सकती हैं।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रख्यात भागवत-रामायण वक्ता आचार्य डॉ भारतभूषण पाण्डेय ने कहा कि वैकुण्ठ लक्ष्मी ही राजर्षि जनक के हल से भूमिजा जानकी होकर अवतीर्ण हुईं।यह परमात्मा की मूल शक्ति और संसार को उत्पन्न करनेवाली प्रधानशक्ति हैं जिनके आविर्भाव के बारे में भगवान ने मनु शतरूपा जी को संकेत कर दिया था।आचार्य ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने रामायण के रूप में सीता-चरित्र का प्रणयन किया है और गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने गिरा और अर्थ तथा जल और वीचि की तरह सीता और राम को सर्वथा एक व अभिन्न माना है।वे उद्भव, पालन, संहार आदि लीलाओं को करनेवाली, सबको निर्मल बुद्धि प्रदान करनेवाली,सबको श्रेय प्रदान करनेवाली रामप्रिया-रामवल्लभा हैं। इस अवसर पर शास्त्रीय गायक राकेश मिश्र ने विनय पत्रिका केपद “अंब अवसर पाई कबहूं” की भावपूर्ण प्रस्तुति की। स्वागत भाषण कुमारसौरभ, संचालन विश्वनाथ दूबे तथा धन्यवाद ज्ञापन शिवदास सिंह ने किया।कार्यक्रम में सत्येन्द्र नारायण सिंह, रामप्रकाश पाण्डेय, ध्रुव कुमार सिंह, नर्मदेश्वर उपाध्याय, महेंद्र पांडेय, पिंटू सिंह आदि प्रमुख लोगों ने विचार व्यक्त किए।
