
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)23 मार्च।जगदेव नगर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के आज छठे दिन प्रवचन करते हुए श्रीमत्सनातनशक्तिपीठाध्यक्ष आचार्य डॉ भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने नर लीला करते हुए शास्त्रोक्त अर्थ,धर्म, काम और मोक्ष के स्वरूप का निदर्शन किया है।वंश परंपरा के संवर्धन के लिए विवाह कर गृहस्थाश्रम में प्रवेश करना चाहिए। विवाह की पवित्रता से वंश की पवित्रता सुनिश्चित होती है। भगवान श्रीकृष्ण ने भगवती वैकुण्ठ लक्ष्मी जो रुक्मिणी के रूप में विदर्भराज भीष्मक की पुत्री होकर अवतीर्ण हुई थीं,के साथ वैदिक विधि से विवाह किया।आचार्य ने कहा कि कामदेव बहुत उद्धत हो गया था और ब्रह्मादि देवताओं को जीत कर अनियंत्रित भी।तब आठ वर्ष की आयु में भगवान श्रीकृष्ण ने रासलीला कर काम पर विजय प्राप्त की।आचार्य ने कहा कि रासलीला काम पर विजय की लीला है ना कि काम की।संपूर्ण विश्व के मन को मथ देनेवाले कामदेव के मन को श्यामसुंदर श्रीकृष्ण ने मथ डाला। वह उनका शरणागत हो गया और बाद में पुत्र होकर प्रद्युम्न के रूप में प्रकट हुआ। आचार्य ने सुदर्शन, शंखचूड़, अरिष्टासुर,केशी,शल,तोशल, चाणूर,मुष्टिक और कंसादिकों के उद्धार की विशद व्याख्या करते हुए “परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृतां” की भगवान की उद्घोषणा को रेखांकित किया।
कथा में भारतीय सेना के सेवानिवृत्त सह प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एस के सिंह और बिहार सरकार के मंत्री और सदर विधायक संजय सिंह टाइगर ने उपस्थित होकर श्रवण किया तथा श्रद्धालुओं व आयोजकों का धन्यवाद किया।कथा की कल पूर्णाहुति होगी और श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् का वार्षिक अधिवेशन भी संपन्न होगा।

