
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)19 मार्च।महिला कॉलेज आरा के मनोविज्ञान विभाग में पीजी सेमेस्टर 4 की छात्राओं के लिए मानवाधिकार विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार का आयोजन डॉ. कायनात रिज़वी द्वारा किया गया, जिसमें प्रोफेसरों एवं छात्राओं ने भाग लेकर इसे सफल बनाया।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए डॉ. कायनात रिज़वी ने मानवाधिकार की अवधारणा पर प्रकाश डाला और बताया कि किस प्रकार हम अपने अधिकारों का सही उपयोग कर सकते हैं। उन्होंने जिनेवा कन्वेंशन का उल्लेख करते हुए कहा कि युद्ध के समय भी देशों को दूसरे देशों के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही उन्होंने मिनाब में एक गर्ल्स स्कूल पर हुई दुखद घटना का जिक्र करते हुए कहा कि यदि जिनेवा कन्वेंशन का सख्ती से पालन किया जाए, तो ऐसी स्थितियाँ उत्पन्न न हों।
विभागाध्यक्ष डॉ. सादिया हबीब ने अपने विचार रखते हुए शिक्षा के अधिकार के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज में लड़कियों को आगे बढ़ने के लिए शिक्षा का पूरा लाभ उठाना चाहिए और घरेलू बंधनों से बाहर निकलकर अपने भविष्य के बारे में सोचने का समय आ गया है। मिस वीनू ने मानवाधिकार को मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाते हुए कहा कि यदि लोगों को उनके अधिकार प्राप्त हों, तो इसका सकारात्मक प्रभाव उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। डॉ. सुधा ने कहा कि जब दो देशों के बीच युद्ध होता है, तो उसका प्रभाव केवल उन्हीं देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अन्य देशों पर भी इसका गहरा असर पड़ता है।डॉ. रश्मि ने छात्राओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें अपने दायरे में रहकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। डॉ. कंचन ने कहा कि अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का पालन भी आवश्यक है। वहीं, डॉ. बिभा तथा अन्य वक्ताओं ने भी मानवाधिकार के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

