
ब्रह्मपुर/बक्सर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)08 फरवरी।महान संत जीयर स्वामी जी महाराज के मंगलानुशासन में गौरीशंकर विवाह महोत्सव आश्रम ब्रह्मपुर मेंआयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आचार्य धर्मेन्द्र जी महाराज ने कहा भगवान के 24अवतारों की कथा श्रीमद्भागवत में आती है।पर मुख्य हेतु भक्तों पर कृपा और दुर्जनों का संहार, धर्म की स्थापना ही मुख्य है। इन्होंने बताया की भगवान सबको सुधरने का मौका देते हैं लेकिन न संभलने वालों का नाश हो जाता है।जैसे राजा परीक्षित जी श्रृंगीऋषि के श्राप दी तेरा जीवन मात्र सात दिन का, परीक्षित महाराज चेत गये। कंश को भी आकाशवाणी के माध्यम से चेताया गया भगवान आठवें गर्भ से प्रकट होंगे,लेकिन कंस अपने को बदलने के बदले,क्रूर से क्रूत्तम होता गया। भगवान कृष्ण को आते ही माता देवकी पिता वसुदेव हथकड़ी पयकड़ी से मुक्त हो जाते,पहरूवा सैनिक सो जाते ,ताले खुल जाते , भगवदीय प्रेणा से वसुदेव जी मथुरा से गोकुल नंदबाबा के घर कृष्ण को पहुंचा वापस जाते मथुरा कारगार में।कंस चिंतित होता और बालकों के बध का निर्णय लेता।इधर गोकुल में नन्द बाबा के लाला का जन्मोत्सव उत्साह के साथ मनाया जा रहा।कहीं छठे दिवस कृष्ण के बध हेतु पूतना को भेजता, कृष्ण उसकी जीवन लीला समाप्त कर देते।भगवान की बाल लीलाओं में – कंस के भेजे गये राक्षसों का बध ,माखन चोरी, मृदा भक्षण, बछड़े की चरवाही,अम्लार्जून वृक्षों, नागनाथन की आध्यात्मिक व सामाजिक वैज्ञानिक पक्षों को प्रमुखता से रखते हुए श्रीमद्भागवत को सत्यं शिवम् सुन्दरं समाज का संविधान बतलाया। श्रीमद्भागवत लौकिक और अलौकिक पक्षों की प्राप्ति का सुन्दर राजमार्ग है।
