न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि आम नागरिकों के जीवन में उसकी अनुभूति होनी चाहिए।

कन्वेंशन सेंटर में आयोजित स्टेट लेवल लीगल सर्विसेज कम एंपावरमेंट कैंप में मुख्य अतिथि के रूप में की शिरकत।

पारंपरिक रूप से किए गए स्वागत से हुए अभिभूत।

मुख्य न्यायधीश ने राज्य में चल रहे राष्ट्रीय लोक अदालत का ऑनलाइन वर्चुअली किया उद्घाटन।

विधिक सेवा एवं सशक्तिकरण शिविरों के माध्यम से न्यायपालिका समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने का कर रही प्रयास: तरलोक सिंह चौहान

विधिक सहायता और सुलह-समझौते जैसे मंच विवादों के समाधान के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास को करते है मजबूत: मुख्य न्यायाधीश

मुख्य न्यायाधीश ने विधिक सहायता क्लीनिक द्वारा प्रस्तुत की गई लघु फिल्म की कि सराहना।

मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने किया परिसंपत्तियों का वितरण।

अंधविश्वास के कारण महिलाओं पर हिंसा, अज्ञानता और भ्रम का परिणाम।

ऐसी कुप्रथाओं को समाप्त करने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होने की जरूरत।

समाज कल्याण हेतु सरकार द्वारा अनेक योजनाएं है संचालित।

आम लोगों तक योजनाओं की सही जानकारी पहुंचाना हम सभी की है जिम्मेदारी।

लोक अदालत जैसी निःशुल्क विधिक सहायताओं का उठाए लाभ।

बाल श्रम एवं बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों पर जताई गई चिंता।
RKTV NEWS/दुमका (झारखंड)13 दिसंबर।दुमका स्थित कन्वेंशन सेंटर में स्टेट लेवल लीगल सर्विसेज कम एंपावरमेंट कैंप का आयोजन किया गया। इस अवसर पर झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।उन्होंने पूरे राज्य में चल रहे राष्ट्रीय लोक अदालत का वर्चुअल रूप से ऑनलाइन उद्घाटन किया।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा), रांची के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद,झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति (HCLSC) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आनंद सेन, झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं दुमका न्यायमंडल के प्रशासनिक न्यायाधीश, न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव उपस्थित थे।
अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में उसकी अनुभूति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विधिक सेवा एवं सशक्तिकरण शिविरों के माध्यम से न्यायपालिका समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने का प्रयास कर रही है, जिससे प्रत्येक नागरिक को समानता, गरिमा और न्याय तक सरल पहुँच सुनिश्चित हो सके।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत, विधिक सहायता और सुलह-समझौते जैसे मंच विवादों के समाधान के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द और आपसी विश्वास को भी मजबूत करते हैं। ऐसे प्रयास न्याय को संघर्षपूर्ण नहीं, बल्कि सहयोगात्मक बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विधिक सेवाएँ अब केवल निःशुल्क कानूनी सहायता तक सीमित नहीं रहकर नागरिकों के समग्र सशक्तिकरण का माध्यम बन चुकी हैं।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से लाभुकों को विधिक जागरूकता, सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी एवं मौके पर ही कई सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं। सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, पहचान पत्र, आजीविका एवं अन्य योजनाओं से संबंधित सेवाएँ एक ही मंच पर उपलब्ध कराई गईं, जिससे लाभुकों को सीधा लाभ मिला।
मुख्य न्यायाधीश ने विधिक सहायता क्लीनिक द्वारा प्रस्तुत लघु फिल्म की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की रचनात्मक पहलें आम नागरिकों की समस्याओं, संघर्षों और आकांक्षाओं को प्रभावी ढंग से सामने लाती हैं तथा विधिक जागरूकता बढ़ाने में सहायक होती हैं।
कार्यक्रम में जिला प्रशासन, न्यायिक पदाधिकारियों, पैनल अधिवक्ताओं, पैरा लीगल वॉलंटियर्स एवं विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों की सक्रिय सहभागिता रही। उपायुक्त द्वारा केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की गई।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्याय तभी सार्थक है जब वह आम जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए। उन्होंने सभी संबंधित संस्थाओं से आह्वान किया कि वे आपसी समन्वय और संवेदनशीलता के साथ कार्य करते हुए न्याय को प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने का संकल्प लें।
इस दौरान झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा), रांची के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि आज भी समाज में अंधविश्वास के कारण महिलाओं एवं कमजोर वर्गों को डायन बताकर हिंसा का शिकार बनाया जाता है, जो अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि डायन नाम की कोई चीज नहीं होती, यह केवल अज्ञानता और भ्रम का परिणाम है।
न्यायमूर्ति ने कहा कि ऐसे कुप्रथाओं को समाप्त करने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होने की आवश्यकता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें, उन्हें कानून की जानकारी दें और अंधविश्वास के विरुद्ध आवाज उठाएं।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा समाज के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका लाभ लेना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। इन योजनाओं की सही जानकारी आम लोगों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है, ताकि जरूरतमंद व्यक्ति बिना किसी भय या भेदभाव के अपने अधिकारों का लाभ उठा सकें।
झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति (HCLSC) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आनंद सेन ने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से आम लोगों की समस्याओं का त्वरित, सरल एवं प्रभावी समाधान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक्सेस टू जस्टिस (Access to Justice) का तात्पर्य यह है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति, चाहे उसकी सामाजिक, आर्थिक अथवा भौगोलिक स्थिति कुछ भी हो, न्याय प्राप्त करने से वंचित न रहे।
न्यायमूर्ति ने कहा कि आम जनों को अपने अधिकारों की जानकारी होना आवश्यक है, ताकि उन्हें यह पता हो कि न्याय कहां और कैसे मिलेगा। इसी उद्देश्य से इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे लोगों में कानूनी जागरूकता बढ़े और वे लोक अदालत एवं निःशुल्क विधिक सहायता जैसी व्यवस्थाओं का लाभ उठा सकें।
उन्होंने आगे कहा कि दुमका जैसे क्षेत्र के लिए इस तरह का आयोजन अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित होती है। ऐसे कार्यक्रम न केवल समस्याओं के समाधान का माध्यम बनते हैं, बल्कि आम जनता को सशक्त कर उन्हें अपने अधिकारों के प्रति सजग भी बनाते हैं।
झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं दुमका न्यायमंडल के प्रशासनिक न्यायाधीश, न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम तथा सामाजिक सुरक्षा से संबंधित योजनाओं का लाभ सुयोग्य लाभुकों को मिलने में तकनीकी कारणों अथवा प्रक्रियात्मक जटिलताओं की वजह से विलम्ब न हो।उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में समन्वय स्थापित करते हुए यह सुनिश्चित किया जाए कि आमजन को योजनाओं का लाभ प्राप्त ससमय प्राप्त हो।
न्यायमूर्ति ने बाल श्रम एवं बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन्हें रोकने के लिए प्रभावी एवं कठोर कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है। इस दिशा में प्रशासन, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों की सक्रिय सहभागिता पर उन्होंने बल दिया।
उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना ही सच्चे अर्थों में न्याय की स्थापना है। जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं एवं सुविधाओं का लाभ नहीं पहुंचेगा, तब तक सामाजिक न्याय की परिकल्पना पूर्ण नहीं हो सकती।
उपायुक्त अभिजीत सिन्हा ने जिले में चल रहे विकास योजनाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश एवं विशिष्ट अतिथियों के द्वारा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत लाभुकों को लाभान्वित किया गया। दो लाभुकों के बीच क्षतिपूर्ति राशि का वितरण किया गया, वहीं एक लाभुक को मोटर दुर्घटना दावा के तहत निर्धारित मुआवज़ा प्रदान किया गया। मत्स्य विभाग द्वारा एक लाभुक को टैंक निर्माण हेतु राशि उपलब्ध कराई गई।
इसके अलावा दो लाभुकों को अबुआ स्वास्थ्य कार्ड प्रदान किया गया। दीदी की दुकान योजना के अंतर्गत एक लाभुक को ₹3 लाख की वित्तीय सहायता दी गई, जबकि जेंडर रिसोर्स सेंटर के लिए एक लाभुक को ₹3 लाख की राशि प्रदान की गई। दो लाभुकों के बीच सामुदायिक वन अधिकार पट्टा का वितरण किया गया।
पशुधन विकास योजना के तहत दो लाभुकों को प्रति लाभुक 67,294 रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई। कुक्कुट पालन योजना के अंतर्गत दो लाभुकों को चेक प्रदान किए गए। सर्वजन पेंशन योजना के तहत एक लाभुक को स्वीकृति पत्र सौंपा गया, जबकि पारिवारिक हित लाभ योजना के अंतर्गत एक लाभुक को निर्धारित लाभ प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में दो लाभुकों को श्रवण यंत्र वितरित किए गए। अबुआ आवास योजना के अंतर्गत एक लाभुक को आवास की चाबी सौंपी गई। इसके साथ ही किट रहित सब्जी उत्पादन योजना के तहत ₹3 लाख की सहायता राशि प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त एक लाभुक को धोती-साड़ी तथा एक अन्य लाभुक को ग्रीन राशन कार्ड प्रदान किया गया।
स्वागत संबोधन सदस्य सचिव झालसा कुमारी रंजना अस्थान द्वारा प्रस्तुत किया गया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुमका सुधांशु कुमार शशि ने दिया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय झारखंड तरलोक सिंह चौहान ने झालसा द्वारा बनाये गए प्रचार सामग्री का विमोचन किया।
इसके उपरांत मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल का निरीक्षण किया,योजनाओं के संबंध में जानकारी ली एवं प्रतिनियुक्त कर्मियों का उत्साहवर्धन किया।
अतिथियों का पारंपरिक रीति रिवाज लोटा पानी से स्वागत किया गया। अतिथियों का स्वागत अंग वस्त्र,स्मृति चिन्ह एवं पौधा प्रदान कर किया गया।

