महिला सशक्तिकरण का दिख रहा प्रत्यक्ष प्रमाण।

महिलाओं को आकर्षित कर रहे घरेलू साज सज्जा के विभिन्न देशी उत्पाद।

महिला उद्यमियों द्वारा शुद्ध रूप से निर्मित सत्तू सहित पौष्टिक प्रदार्थों के आटो की बढ़ी मांग।

महज चार दिनों में महिला उद्यमियों ने किया व्यवसाय में करोड़ का आंकड़ा पार।

युवा युवतियों को आकर्षित कर रहे सौंदर्य परिधान।

देशी स्वाद का लुफ्त उठा रहे आगंतुक।
RKTV NEWS/पटना (बिहार)16 सितंबर।गृहस्थ जीवन से बाहर निकलकर कामकाजी महिला बनते हुए एक कुशल उद्यमी के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाली ग्रामीण महिलाये अपनी सफलता की दास्ताँ बिहार सरस मेला में सुना रही हैं l सौ से अधिक ग्रामीण महिलाएं राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित बिहार सरस मेला में खुद के द्वारा उत्पादित हस्तशिल्प और अपने अपने प्रदेश के मशहूर खाद्य पदार्थ और व्यंजन को लेकर उपस्थित हैं l
बिहार सरस मेला ग्रामीण विकास विभाग के तत्वाधान जीविका द्वारा 12 सितम्बर से 21 सितम्बर तक सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक आयोजित है l
सरस मेला में बिहार समेत 22 राज्यों में गठित स्वयं सहायता समूह से जुडी सवा सौ से अधिक ग्रामीण शिल्पकार एक स्थापित व्यवसाई और उद्यमी बनकर अपने प्रदेश का प्रतिनिधित्व सुसज्जित 130 स्टॉल पर कर रही हैं l
सरस मेला में महिला उद्यमियों ने घर की ड्योढ़ी से बाहर निकलकर अपने क्षेत्र-प्रक्षेत्र के हस्तशिल्प को पुनर्जीवित करते हुए राष्ट्रीय पटल पर पहचान दिलाई है और उसे सरस मेला जैसे बड़े बाज़ार में बिक्री करते हुए खुद को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाया है l बिहार के अरवल जिला के मानिकपुर गाँव से आई रिंकी केशरी की पहचान ग्रामीण महिला उद्यमी के तौर पर राष्ट्रीय स्तर पर है l देश के किसी भी बड़े स्तर पर आयोजित उद्यमी मेला में बिहार का प्रतिनिधित्व करती हैं l रिंकी केशरी वर्ष 2015 से जाग्रति जीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुडी हैं l उन्होंने बालपन के खिलौनो को विलुप्त होने से बचाया है l लकड़ी से बने लट्टू , घिरनी, झुनझुना, टिकटिक, टिकटाक, गुल्लक, हाथ गाड़ी , बांसुरी , पजल जैसे खिलौनों को फिर से स्थापित किया है l बच्चों को मोबाइल की लत से दूर रखने के लिए आगंतुक इनके स्टॉल से पजल, दिमागी पहेली समेत खेल –खेल में दिमागी कसरत समेत पढाई के लिए खिलौने खरीद रहे हैं l रिंकी बताती हैं कि दस वर्ष पूर्व सौ रूपया इनके लिए मायने रखता था लेकिन अब उनका वार्षिक टर्न वोवर 10 लाख रुपये से अधिक का है l अब अपना पक्का मकान है , दर्जन भर कारीगरों को इन्होने अपने यहाँ रोजगार दिया है और दो दर्जन से अधिक महिलाओं को फाइन आर्ट्स और हस्तशिल्प का प्रशिक्षण देकर उसे अगली पीढ़ी तक बढाया है l इस कार्य में इनके पति पुनीत केसरी सहयोग प्रदान करते हैं l बिहार के बाज़ार समेत अन्य राज्यों में भी इनके द्वारा उत्पादित खिलौनों की मांग हैं l रिंकी केशरी की ही तरह अन्य स्टाल पर आई ग्रामीण उद्यमी उन्ही की तरह गृहस्थ जीवन के साथ ही कुशल उद्यमी के तौर पर अपने को स्थापित किया है l आत्मनिर्भरता के विविध रंगों एवं स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ग्रामीण महिला उद्यमियों के स्वावलंबन, सशक्तीकरण और उनके आर्थिक एवं सामाजिक परिवर्तन की झलक बिहार सरस मेला में आप सभी के अवलोकनार्थ पुनः प्रदर्शित है l
दस दिवसीय मेला में बिहार समेत 22 राज्यों में क्रमशः झारखण्ड, ओड़िसा, आसाम, मणिपुर , पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र , आँध्रप्रदेश एवं उत्तराखंड समेत कई राज्यों से से आई स्वयं सहायता समूह से जुडी महिला उद्यमियों के स्टॉल पर हस्तशिल्प , लोक कला एवं देशी व्यंजनों की खरीद-बिक्री हो रही है l
सरस मेला में सदियों पुरानी लोक कलाएं, संस्कृति, वाद्यय यंत्रों की सुमधुर गूंज पुन: पुनर्जीवित हुई है और मेला के माध्यम से आगंतुकों के घर तक जा रही हैं l
बिहार से सभी 38 जिलों से स्वयं सहायता समूह की महिला उद्यमी शिरकत कर रही हैं और अपने-अपने क्षेत्र के लोक शिल्प एवं व्यंजनों की प्रदर्शनी सह बिक्री कर आगंतुकों को बिहार की समृद्ध लोक कला , परंपरा , स्वाद एवं संस्कृति से अवगत करा रही हैं।
चार दिन में 1 करोड़ 12 लाख से अधिक के उत्पादों एवं व्यंजनों की खरीद-बिक्री हुई है l लगभग एल लाख सात हजार लोग आ चुके हैं l आगंतुकों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही है। सोमवार 15 सितम्बर को 35 लाख 22 हजार रुपये से अधिक की खरीद-बिक्री हुई है l

