
उज्जैन/ मध्यप्रदेश (अविनाश चतुर्वेदी) 14 अगस्त। श्री महाकाल महालोक में श्रावण-भादौ मास में प्रतिदिन सायं 06 से 08 बजे तक आयोजित होने वाली श्री महाकालेश्वर सांस्कृतिक संध्या के 22 वे दिवस में प्रथम प्रस्तुति आउचिन बेनर्जी उज्जैन के शास्त्रीय धु्रपद गायन की हुई। श्री बेनर्जी द्वारा राग यमन में नोम-तोम के आलाप से प्रारंभ कर विलंबित मध्य व ध्रुत अलाप के पश्चात ताल धमार (14 मात्रा में), बंदिश केसर घोल के रंग बनो……… की प्रस्तुति दी गई।
आपके साथ पंडित श्रीधर व्यास पखावज पर व मधुमिता बेनर्जी ने तानपुरे पर संगत की।
श्री महाकालेश्वर सांस्कृतिक संध्या के 22 वे दिवस की द्वितीय प्रस्तुति आरंभ कथक नृत्य पाठशाला उज्जैन की निदेशिका डाॅ.अन्जना चौहान के निर्देशन में समूह कथक की हुई। जिसमें संस्था की नृत्यांगनाओं द्वारा गणेश वंदना हे गजवदन वक्रतुण्ड महाकाय……., शिव भजन डिमिक डिमिक डमरू कर बाजे,प्रेम मगन नाचे भोला……. आदि की प्रस्तुति दी। प्रस्तुति का समापन शिव स्तुति आशुतोष शशांक शेखर चंद्रमौली चिदंबरा,कोटि-कोटि प्रणाम शम्भू कोटि नमन दिगम्बरा…… से किया गया। प्रस्तुति में मानस शर्मा, अदिति राठौर गेहलोत, वैष्णवी नागर, हितांशी रठा, पहल मेहरवाल, ओजस्वी शर्मा, सन्विका शर्मा सम्मिलित हुई।
कार्यक्रम के प्रारंभ में पण्डित रमण त्रिवेदी, पुजारी श्री महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन द्वारा दीप प्रज्जवलन किया गया। इसके पश्चात श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के डिप्टी कलेक्टर एवं उप प्रशासक सिम्मी यादव द्वारा सभी गणमान्य अतिथि का दुपट्टा, प्रसाद व स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मान किया गया। इसके पश्चात अतिथि द्वारा प्रस्तुति हेतु पधारे सभी कलाकारों एवं सहयोगी कलाकारों का दुपट्टा, प्रसाद व प्रशस्ति पत्र प्रदान कर स्वागत व सम्मान किया गया। मंच संचालन दीपक उपाध्याय द्वारा किया गया।
