
आरा/भोजपुर ( डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)18 जुलाई।श्रावण समारधना के क्रम में श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् एवं सनातन-सुरसरि सेवा न्यास द्वारा श्रीसहदेव गिरि मंदिर कतिरा में आयोजित सप्तदिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के सातवें दिन प्रवचन करते हुए बताया की धर्म जीवन का एक मात्र आधार है
आरा।आज श्रावण समारधना के क्रम में श्रीसनातन शक्तिपीठ संस्थानम् एवं सनातन-सुरसरि सेवा न्यास द्वारा श्रीसहदेव गिरि मंदिर कतिरा में आयोजित सप्तदिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के सातवें दिन प्रवचन करते हुए आचार्य डॉ भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि धर्म का सार सत्य है और वह सत्य ही शिव है। कोटिरुद्र संहिता की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब धर्मप्राण प्राणियों और भगवद्भक्तों पर संकट अथवा असुर-अराजक तत्त्वों का आघात आया तब-तब भगवान शिव ने विविध अवतार धारण किए और असुरों का संहार किया तथा धार्मिक जनों की रक्षा की। शास्त्र और शिव भक्ति हमें सबके हित और सबकी सेवा की प्रेरणा प्रदान करते हैं। आचार्य ने कहा कि संपूर्ण प्राणियों का अवलंब और उनका परमहित धर्मपालन में ही निहित है।दस पीढ़ियों के लिए धन संग्रह करना मूर्खता है जबकि अपने धन से दस परिवारों का पोषण करना धर्म है। यही धर्म हमारे वंशजों की असली पूंजी तथा उनके सौभाग्य का असली कारक सिद्ध होगा। काशी पंचकोसी तथा भगवान विश्वनाथ की महिमा का वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि ब्रह्मा जी के प्रत्येक दिन बीतने पर एक बार जलप्रलय होता है किन्तु भगवान शिव काशी को अपने त्रिशूल पर उठा लेते हैं और उसकी रक्षा करते हैं। काशी भुक्ति, मुक्ति, ज्ञान-विज्ञान और धर्म की नगरी है जो साक्षात् भगवान शिव द्वारा बनाई और बसाई गई है।यह साक्षात् शिव का विग्रह ही है। आचार्य ने सभी से वैदिक सनातन धर्म का पालन करने और सभी प्राणियों के हित में अनुरक्त रहते हुए संतोष तथा शांति से जीवनयापन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दृढ़ विश्वास के साथ भगवान शिव की शरणागति और उपासना हमारे समस्त लौकिक-पारलौकिक उत्कर्ष का परम साधन है। प्रातःकाल वैदिक पंचदेव पूजन, शिवार्चन, रुद्राभिषेक तथा हवन संपन्न हुआ।पं संजय द्विवेदी (प्रयागराज), पुजारी पं अजय कुमार मिश्र एवं पं उदयकांत मिश्र आदि ने समस्त कर्मकांड संपन्न कराया। इस अवसर पर प्रो बलिराज ठाकुर, मधेश्वर नाथ पाण्डेय,एस के सिंह, विश्वनाथ दूबे, राजीव सिंह, विनोद सिंह, विद्याधर प्रसाद, कामदेव कुमार, ब्रजकिशोर पांडेय सहित तमाम प्रमुख लोगों ने पूजन-अर्चन एवं प्रवचन में भाग लिया। प्रसाद वितरण के साथ सप्तदिवसीय अनुष्ठान गुरुवार को संपन्न हो गया।आचार्य डॉ भारतभूषण जी महाराज ने कहा कि धर्म का सार सत्य है और वह सत्य ही शिव है। कोटिरुद्र संहिता की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जब-जब धर्मप्राण प्राणियों और भगवद्भक्तों पर संकट अथवा असुर-अराजक तत्त्वों का आघात आया तब-तब भगवान शिव ने विविध अवतार धारण किए और असुरों का संहार किया तथा धार्मिक जनों की रक्षा की। शास्त्र और शिव भक्ति हमें सबके हित और सबकी सेवा की प्रेरणा प्रदान करते हैं। आचार्य ने कहा कि संपूर्ण प्राणियों का अवलंब और उनका परमहित धर्मपालन में ही निहित है।दस पीढ़ियों के लिए धन संग्रह करना मूर्खता है जबकि अपने धन से दस परिवारों का पोषण करना धर्म है। यही धर्म हमारे वंशजों की असली पूंजी तथा उनके सौभाग्य का असली कारक सिद्ध होगा। काशी पंचकोसी तथा भगवान विश्वनाथ की महिमा का वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि ब्रह्मा जी के प्रत्येक दिन बीतने पर एक बार जलप्रलय होता है किन्तु भगवान शिव काशी को अपने त्रिशूल पर उठा लेते हैं और उसकी रक्षा करते हैं। काशी भुक्ति, मुक्ति, ज्ञान-विज्ञान और धर्म की नगरी है जो साक्षात् भगवान शिव द्वारा बनाई और बसाई गई है।यह साक्षात् शिव का विग्रह ही है। आचार्य ने सभी से वैदिक सनातन धर्म का पालन करने और सभी प्राणियों के हित में अनुरक्त रहते हुए संतोष तथा शांति से जीवनयापन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि दृढ़ विश्वास के साथ भगवान शिव की शरणागति और उपासना हमारे समस्त लौकिक-पारलौकिक उत्कर्ष का परम साधन है। प्रातःकाल वैदिक पंचदेव पूजन, शिवार्चन, रुद्राभिषेक तथा हवन संपन्न हुआ।पं संजय द्विवेदी (प्रयागराज), पुजारी पं अजय कुमार मिश्र एवं पं उदयकांत मिश्र आदि ने समस्त कर्मकांड संपन्न कराया। इस अवसर पर प्रो बलिराज ठाकुर, मधेश्वर नाथ पाण्डेय,एस के सिंह, विश्वनाथ दूबे, राजीव सिंह, विनोद सिंह, विद्याधर प्रसाद, कामदेव कुमार, ब्रजकिशोर पांडेय सहित तमाम प्रमुख लोगों ने पूजन-अर्चन एवं प्रवचन में भाग लिया।
