
आरा/भोजपुर (डॉ दिनेश प्रसाद सिन्हा)17 जून। 17 जून 2023 को ह्रदय गति रुक जाने के कारण सुर सम्राट, लोककलाकार मुक्तेश्वर उपाध्याय का निधन हृदयगति रुकने के कारण हो गई थी।शहर के राजनीतिक, सामाजिक,और सभी मंदिरों में अपनी सुरीली आवाज से दर्शकों को उत्साहित करने वाले उपाध्याय जी अब हम सबों से बहुत दूर चले गये लेकिन उनकी आवाज आज भी कानों में गूंजते रहती है।
ये बातें उनके पुत्र पत्रकार बंटी भारद्वाज ने श्रद्धा सुमन अर्पित कर बताया।सादगी का स्वर, राजनीति का संतुलन, संगीत की साधना इनकी अविस्मरणीय विरासत है। पत्रकार डा दिनेश प्रसाद सिन्हा ने भावांजलि में बताया की हंसमुख चेहरा, ललाट पर तिलक,साथ में गमछा, एक स्वतंत्र योगी के रूप में भ्रमण करते ,किसी ने,कभी भी याद किया ,बाबा हाजिर,फिर क्या मंच पर बिना साज बाज, बिना कोई नखरा, दो चार लाईन भोजपुरी में उद्बोधन और फिर भक्ति हो या राजनीतिक स्वर लहरी से मंच के नेताओं का सम्मान बढ़ाना,हित मित्रों को प्रतिष्ठित करना,और समसा गीतों से श्रोताओं को रोमांचित करने की अद्भुत शक्ति थी। छोटे हो या बड़े सभी का मुस्कुराते हुए हाथ जोड़ कर अभिवादन करना मुक्तेश्वर बाबा की पहचान थी। प्रत्यक्षतः हमलोगों के बीच नहीं हैं फिर भी नतमस्तक है,उनके आवाज सदियों सदियों तक प्रेरित करते रहेंगे। लगभग चार दशकों तक अपनी सुरीली आवाज से भोजपुरिया समाज में प्रतिष्ठित रहे।ये एक कलाकार के साथ साथ भोजपुर जिला कांग्रेस के कला संस्कृतिक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष थे।बिहार के मुख्यमंत्री रहे लालू प्रसाद यादव के काफी करीबी कलाकारों मे से एक थे,और उनके मंचों पर इनके गीतों के बाद ही कार्यक्रम शुरू होता था। पटना मे आयोजित लाठी रैली मे भी मुक्तेश्वर उपाध्याय भोजपुरी के प्रसिद्ध गायक बालेश्वर बिरहिया के साथ अपनी प्रस्तुति दे चुके है।राम सीता विवाह समारोह, रमना हनुमान मंदिर सहित कई विभिन्न समाजिक क्षेत्रो से जुड़ें रहे।इनके दादा जी नाथशरण उपाध्याय स्वतंत्रता सेनानी थे जिनके याद मे हर वर्ष एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया करते थे। जिनमे कई राजनीतीज्ञ दिग्गज वरीय पदाधिकारी शिरकत किया करते थे।
