डीएवी विद्यालय नहीं, आन्दोलन है : प्रधानाचार्या नीशू जायसवाल
RKTV NEWS/आरा(भोजपुर)01 जून।1 जून 1886 डीएवी के लिए एक ऐतिहासिक दिवस है। आज ही के दिन लाहौर में पहले डीएवी विद्यालय की स्थापना हुई थी। तब से लेकर अबतक भारत के कोने-कोने में डीएवी विद्यालयों के माध्यम से शैक्षिक क्रांति पताका लहरा रही है। इस महती दिवस पर आज स्थानीय बी.एस डीएवी पब्लिक स्कूल में प्रातःकालीन वैदिक हवन-यज्ञ का आयोजन किया गया।
हवन-यज्ञ में शामिल प्रधानाचार्या के साथ-साथ उपस्थित शिक्षक-शिक्षिकाओं व शिक्षकेत्तर कर्मियों ने मिलकर भोजपुर जनपद में संस्कार युक्त शिक्षा के उद्देश्य पथ पर सदैव बढ़ते रहने के संकल्प को दुहराया। प्रधानाचार्या ने कहा कि महर्षि दयानंद ने वेदों की ओर लौटने का आह्वान कर के यह संकेत दिया था कि आधुनिक जीवन मूल्यों के समानांतर हमें अपनी सभ्यता व संस्कृति के सकारात्मक पहलुओं को भी साथ लेकर चलना होगा। मूल्यगत शिक्षा का उद्देश्य तभी पूरा होगा। डीएवी देश की एक अग्रणी शिक्षण संस्था है जो आज भी सामाजिक- सांस्कृतिक मूल्यों के साथ शिक्षा के व्यापक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए संकल्पित है। डीएवी सिर्फ विद्यालय नहीं, शैक्षिक आन्दोलन है। उपस्थित शिक्षकों ने भी भारतीय शिक्षा व्यवस्था में महर्षि दयानंद के चिंतन-दर्शन व डीएवी के योगदान को याद किया।
प्रात:कालीन हवन यज्ञ में प्रधानाचार्या नीशू जायसवाल, वरिष्ठ शिक्षक सुशील कुमार, संजय श्रीवास्तव, हिरण्यमय स्मित, शिवा स्रोत्रीय, विजेंद्र कुमार सिन्हा आदि उपस्थित रहे।

