
RKTV NEWS/राजीव रंजन सिन्हा, 22 मार्च।ये कैसा बिहार दिवस जब बिहार राज्य के निर्माता डॉक्टर सच्चिदानंद सिन्हा का कहीं कोई चर्चा नहीं न कोई राजकीय स्तर पर उन पर कोई कार्यक्रम। जिन्होंने बिहार राज्य के निर्माण के लिए अंग्रेजों से लम्बा संघर्ष किया और इस प्रकार उनके संघर्ष से 22 मार्च 1912 को बंगाल से बिहार राज्य का अलग स्थापना हुआ। उन्होंने बिहार राज्य के निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आज जो बिहार विधानसभा और बिहार विधान परिषद है वो डॉक्टर सच्चिदानंद सिन्हा के जमीन पर है जिसे उन्होंने सरकार को दान दिया था। इतना ही नहीं बिहार विद्यालय परीक्षा समिति का विशाल भव्य भवन जो उनका आवास हुआ करता था और सिन्हा लाइब्रेरी उनका व्यक्तिगत वकालत का दफ्तर हुआ करता था उसे भी उन्होंने सरकार को दान कर दिया।पटना एयरपोर्ट के लिए भी उन्होंने अपना 70 बीघा जमीन दान कर दिया। 1954 में पटना एयरपोर्ट के निर्माण का कार्य शुरू हुआ था जबकि इसके लिए उन्होंने 1944 में ही सरकार को जमीन दान कर दिया था। बिहार को बंगाल से अलग होने के बाद अंग्रेजों से कानूनी लड़ाई लड़कर उन्होंने पटना को राजधानी बनवाया था। जब की अंग्रेज रांची को राजधानी बनाना चाहते थे। पटना शहर का पहला नक्शा भी अंग्रेजों को बनाकर सिन्हा साहब ने ही दिया था। संविधान सभा के पहले अध्यक्ष डॉक्टर सच्चिदानंद सिन्हा थे उनके बाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष बने लेकिन वोट की राजनीति के लिए राजनीतिक दल ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को संविधान निर्माता बना दिया। जिस राजनीतिक दल को कायस्थ समाज आंख मूंद कर वोट देता है। वो राजनीतिक पार्टी भी कायस्थ समाज का उपेक्षा कर रहा है और हमारे महापुरुष को उपेक्षा का शिकार बना रहा है । अब समय आ गया है कायस्थ समाज इस पर गंभीरता से विचार करें। कायस्थ समाज का उपेक्षा करने वाले बिहार सरकार का अखिल भारतीय कायस्थ महासभा बिहार प्रदेश विरोध करता है। बिहार दिवस के अवसर पर बिहार के निर्माता डॉक्टर सच्चिदानंद सिन्हा को शत-शत नमन।

