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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस-2025 का थीम..

RKTV NEWS/अधिवक्ता अतुल प्रकाश,07 मार्च।हर वर्ष की भांति 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2025 की थीम “एक्सेलरेट एक्शन” या “कार्रवाई में तेज़ी लाना” है। यह थीम महिलाओं के जीवन को बेहतर बनाने के लिए तेज़ी से प्रगति करने की अपील करती है और लोगों, सरकारों और संगठनों को महिलाओं के उत्थान, समान अवसर प्रदान करने और भेदभाव समाप्त करने की दिशा में सक्रिय कदम उठाने के लिए प्रेरित करती है। इस थीम का उद्देश्य जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं के समावेशन को बढ़ावा देना है, जिसके कई आयाम हैं, जिन्हें नीचे विस्तार से समझाया गया है:

सामाजिक न्याय

विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं का समावेशन सामाजिक न्याय के उद्देश्य को आगे बढ़ाता है।

विकास और प्रगति

दुनिया की आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 50% है। अगर दुनिया को प्रगति करनी है तो उन्हें पीछे छोड़ना कोई विकल्प नहीं है।

कार्यबल में भागीदारी

महिलाओं को रोजगार के लिए समान अवसर प्रदान करने से महिला श्रम बल भागीदारी दर (FLFPR) को बढ़ावा मिलेगा। यह बदले में, कौशल और दृष्टिकोण की विविधता को बढ़ावा देगा।

नवाचार में वृद्धि

महिलाओं के समावेशन से विभिन्न दृष्टिकोण और प्रतिभाएँ सामने आती हैं, जो अधिक नवाचार और बेहतर समाधानों को जन्म देती हैं।

बेहतर निर्णय-निर्माण

नेतृत्व पदों पर लिंग समावेशन यह सुनिश्चित करता है कि निर्णय प्रक्रियाओं में महिलाओं के दृष्टिकोण और आवश्यकताऍ शामिल हों, जिससे सामाजिक अन्याय, आर्थिक असमानता, जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के समाधान में नवाचार संभव हो सके।

सामाजिक-आर्थिक समानता

लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण प्राप्त करने के लिए समाज के सभी पहलुओं में महिलाओं का समावेश महत्वपूर्ण है।
सामाजिक परिवर्तन : पुरुषों की तुलना में, महिलाएँ अक्सर बेहतर विकल्प चुनती हैं और अपनी कमाई का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा परिवार और समाज में निवेश करती हैं। इस प्रकार, महिलाओं के समावेश को बढ़ावा देने से हमारे समाज में सकारात्मक बदलाव का प्रभाव पड़ेगा।

स्वास्थ्य और शैक्षिक परिणाम

महिलाएँ परिवारों और समुदायों के स्वास्थ्य और कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि महिलाओं के समावेशन से बेहतर स्वास्थ्य और शैक्षिक परिणाम प्राप्त होते हैं।

शांतिपूर्ण समाज

वास्तविक अर्थों में महिलाओं का समावेशन लिंग भेदभाव को समाप्त करने में सहायक होगा, जिससे घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न जैसी समस्याओं में कमी आएगी। यह लैंगिक रूढ़िवादिता को दूर करने और सभी क्षेत्रों में महिलाओं के लिए बाधाओं को तोड़ने के लिए दृढ़ कार्रवाई में तेजी लाने में मदद करता है।

अतुल प्रकाश
(लेखक, एडिशनल गवर्नमेंट काउंसिल गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया, सिविल कोर्ट,आरा है)

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