
दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता एवं पत्रकार सुमित कुमार मिश्र ने उठाया मुद्दा, स्वर्गीय प्रभात झा के प्रयासों को आगे बढ़ाने का किया आग्रह
नई दिल्ली/मनोज कुमार प्रसाद 24 अक्टूबर। हिंदी एवं भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा, शोध और ज्ञान-विज्ञान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान करने की मांग उठाई गई है। दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता, पत्रकार एवं लेखक सुमित कुमार मिश्र ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से आवश्यक पहल करने का अनुरोध किया है। उन्होंने इस प्रस्ताव पर प्राथमिकता के आधार पर विचार करने तथा संबंधित मंत्रालय एवं विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है।
प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में सुमित कुमार मिश्र ने कहा है कि अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि हिंदी और भारतीय भाषाओं के माध्यम से आधुनिक ज्ञान-विज्ञान, तकनीक, शोध तथा राष्ट्रीय चेतना को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विश्वविद्यालय में विज्ञान, तकनीक, चिकित्सा, विधि और प्रबंधन जैसे आधुनिक विषयों की शिक्षा भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने के प्रयासों को उन्होंने दूरदर्शी बताते हुए इसे राष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
सुमित कुमार मिश्र ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि हिंदी एवं अन्य भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा का विस्तार विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा में ज्ञान अर्जित करने के अधिक अवसर प्रदान कर सकता है। इससे उच्च शिक्षा तक पहुंच को व्यापक बनाने, शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने और भारतीय भाषाओं में मौलिक शैक्षणिक सामग्री विकसित करने में सहायता मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने से उसे केंद्र सरकार के स्तर पर वित्तीय सहायता, शोध-सुविधाओं के विकास, शैक्षणिक संसाधनों के विस्तार तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। इससे विश्वविद्यालय को भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा के एक प्रभावी राष्ट्रीय मॉडल के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा सकेगा।
पत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत भारतीय भाषाओं और मातृभाषा-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य का भी उल्लेख किया गया है। मिश्र का मानना है कि विश्वविद्यालय को केंद्रीय संस्थान का स्वरूप प्रदान करने की दिशा में पहल इस उद्देश्य को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में सहायक हो सकती है।
स्वर्गीय प्रभात झा के प्रयासों का दिया हवाला
प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सुमित कुमार मिश्र ने भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय प्रभात झा द्वारा इस विषय में किए गए प्रयासों का विशेष उल्लेख किया है। उन्होंने बताया कि प्रभात झा ने 24 फरवरी 2020 को तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को पत्र लिखकर अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया था।
मिश्र ने अपने पत्र में कहा है कि प्रभात झा का विचार था कि यह विश्वविद्यालय हिंदी एवं भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श संस्थान बन सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि प्रभात झा द्वारा उठाए गए इस विषय को आगे बढ़ाते हुए संबंधित मंत्रालय एवं विभाग को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जाए।
इस मांग के माध्यम से मिश्र ने विश्वविद्यालय के विकास के साथ-साथ भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए पहले किए गए प्रयासों को संस्थागत रूप देने की आवश्यकता रेखांकित की है।
अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति को राष्ट्रीय शैक्षणिक स्वरूप देने की पहल
पत्र में स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के हिंदी एवं भारतीय भाषाओं के प्रति समर्पण का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि उनके नाम पर स्थापित विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त बनाना भारतीय भाषाओं के सम्मान और भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
सुमित कुमार मिश्र के अनुसार, विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने का प्रस्ताव केवल संस्थागत उन्नयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय भाषाओं में आधुनिक शिक्षा, अनुसंधान और ज्ञान-सृजन की संभावनाओं को विस्तार देने से भी जुड़ा है। इससे हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं में उच्च स्तरीय पाठ्यक्रम, शोध और शैक्षणिक सहयोग को प्रोत्साहित करने की दिशा में नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत, भारतीय ज्ञान परंपरा और भारत-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था की भावना के अनुरूप एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।
केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार से पहल की अपेक्षा
प्रधानमंत्री को संबोधित पत्र में सुमित कुमार मिश्र ने अनुरोध किया है कि अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय, भोपाल को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान करने के प्रस्ताव पर सहानुभूतिपूर्वक और प्राथमिकता के आधार पर विचार किया जाए। उन्होंने इस विषय में संबंधित केंद्रीय मंत्रालय एवं विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की भी मांग की है।
इस पत्र की प्रतिलिपि भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार तथा अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. देव आनंद हिण्डोलिया को भेजे जाने का उल्लेख किया गया है।
पत्र के साथ स्वर्गीय प्रभात झा द्वारा 24 फरवरी 2020 को तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री को भेजे गए पत्र की प्रति संलग्न करने की बात भी कही गई है।
सुमित कुमार मिश्र ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करेगी। उनके अनुसार, यदि इस दिशा में आवश्यक संस्थागत और नीतिगत पहल होती है, तो हिंदी एवं भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में दूरगामी परिवर्तन की संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।
उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने का प्रस्ताव एक नीतिगत विषय है। इस संबंध में अंतिम निर्णय केंद्र सरकार की निर्धारित प्रक्रिया और आवश्यक वैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही लिया जा सकता है।
